IIसिविल अस्पताल में हर महीने आ रहे स्पाइनल टीबी के दो मरीज
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Iरीढ़ की हड्डी के बीच में संक्रमण होने से होता है टीबी, चलना हो जाता है मुश्किल
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Iसावधान! अगर आप कमर दर्द मानकर दवाएं खा रहे हैं तो यह खतरनाक भी हो सकता है। दरअसल, तेज और लगातार कमर दर्द टीबी का लक्षण भी हो सकता है। सिविल अस्पताल में रीढ़ की हड्डी में टीबी (स्पाइनल टीबी) के हर माह एक से दो मरीज आ रहे हैं। इनका क्षय रोग विभाग की निगरानी में उपचार चल रहा है।
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Iटीबी की बीमारी के सबसे अधिक मरीज फेफड़ों से संबंधित होते हैं लेकिन टीबी रीढ़ की हड्डी पर भी वार कर रहा है। सिविल अस्पताल के क्षय रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रुड़की और देहात क्षेत्र में करीब 444 लोगों का टीबी का उपचार चल रहा है। इनमें से सबसे अधिक मरीज फेफड़ों में टीबी के हैं। इनमें से कुछ मरीज ऐसे भी हैं जो रीढ़ की हड्डी में टीबी (स्पाइनल टीबी) से भी ग्रसित हैं।
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Iसिविल अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. नितीश कुमार का कहना है कि रीढ़ की हड्डी में लगातार दर्द होना टीबी का लक्षण हो सकता है। रीढ़ की हड्डी में संक्रमण होने से गांठ बन जाती है और यह टीबी का रूप ले लेती है इसलिए कमर दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अन्य जांचों के साथ ही टीबी की भी जांच करानी चाहिए। वहीं, क्षय रोग विभाग के प्रभारी आशीष शर्मा का कहना है कि अस्पताल में हर माह एक से दो मरीज स्पाइनल टीबी के आ रहे हैं। करीब 32 स्पाइनल मरीजों का उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि स्पाइनल टीबी के मरीजों का 18 माह तक उपचार चलता है।
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Iये हैं लक्षण-
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I- कमर में लगातार दर्द।
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I- कमर में अकड़न।
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I- चलने-फिरने में परेशानी।
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I- बुखार और रात में पसीना आना।
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I- वजन घटना।
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I- झुनझुनी होना।I