रुड़की। हौसलों में जान हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान लगने लगती है। कुछ यही बात दिल्ली से आए कक्षा नौ के छात्र ऋषभ ने साबित कर दिखाई है। दोनों पैरों से विकलांग होने के बाद भी ऋषभ कांवड़ यात्रा में पहिये लगी लकड़ी की पटरी पर घिसट-घिसटकर आस्था की दूरी नाप रहा है।
दिल्ली के मंगोलपुरी में रहने वाले ऋषभ के बचपन से ही दोनों पैरों में पोलियो की बीमारी है। जिसके चलते वह जीवन भर खड़ा तक नहीं हो पाया। लेकिन उसके जज्बे को देखो तो वह सही सलामत पैर वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। कांवड़ यात्रा में हरिद्वार से जल भरकर पहले नीलकंठ और फिर हरिद्वार से दिल्ली की यात्रा पूरी करने चला ऋषभ शनिवार को रुड़की में कांवड़ पटरी पहुंचा। उसने बताया कि वह कांवड़ यात्रा एक बार पहले भी कर चुका है। ऋषभ ने बताया कि वह अपने पैरों को ठीक करने की मन्नत लेकर यहां आया है। उसे पूरा विश्वास है कि जिस भगवान ने उसे दोनों पैरों से वंचित किया है, वही भगवान एक न एक दिन चमत्कार करेगा और वह भी आम लोगों की तरह चल सकेगा।