- समय से रोग पहचान कर उपचार से फसल को बचाया जा सकता है
नारसन। नारसन क्षेत्र में इस दौरान रबी फसल गेहूं, सरसों व चारे वाली फसल उगी हुई है। मौजूदा मौसम को देखते हुए विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि गेहूं की फसल के लिए पीला रतुआ रोग एक गंभीर खतरा बन सकता है। यह फंगल (कवक) रोग है जो गेहूं के पत्तों पर पीले धब्बे पैदा करता है जो धीरे-धीरे पूरे पौधे को प्रभावित कर सकता है। अगर समय रहते इस रोग का उपचार न किया जाए तो फसल पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में हुई बारिश से कवक रोग नम वातावरण के साथ तापमान बढ़ने पर तेजी के साथ फैल सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ पुरुषोतम कुमार में बताया कि गेहूं का पीला रतुआ रोग एक कवकरोग है जो नम वातावरण व तापमान बढ़ने पर तेजी से फैलता हैं। इसलिए समय-समय पर अपनी फसल का निरीक्षण करते रहें और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर उपचार करें। अगर रोग फैल चुका हो तो तुरंत रसायनिक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी होता है।
ऐसे करें पीला रतुआ रोग की पहचान
- गेहूं के पत्तों पर पीले रंग की धारियां दिखाई देना।
- पत्तियों पर छोटे-छोटे, चमकदार पीले रंग के दाने दिखाई देना।
- पत्तियों को छूने पर पीला पाउडर (हल्दी)जैसा पदार्थ हाथ में लगना।
- पत्तियों की गुणवत्ता कम होना ।
पीला रतुआ रोग से बचाव के उपाय
- फसल का निरीक्षण करते रहे ताकि समय से रोग फैलने से बचा जा सके।
- फसल को आवश्यकतानुसार पानी दें अधिक पानी देने से भी रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- रासायनिक उपचार :- प्रोपिकोनाजोल एक एमएल प्रति लीटर की दर से फसल पर स्प्रे करे ।