डीपीसी (जिला योजना समिति) के चुनाव में कांग्रेस के दो गुट आमने-सामने हैं। एक गुट ने 21 और दूसरे गुट ने 15 का नामांकन कराया है। गुटबाजी के चलते विरोधी दलों के सदस्यों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं की गई है।
डीपीसी के चुनाव के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 40 सदस्यीय डीपीसी में शामिल होने के लिए 21 को निर्वाचित 47 जिला पंचायत सदस्यों में से चुना जाना है। 21 सदस्यों के लिए 36 लोगों की ओर से नामांकन किया गया है। हैरत की बात यह है कि इन सदस्यों का नामांकन करने वाले कांग्रेसी ही हैं। यही नहीं कांग्रेस के दोनों गुटों ने पार्टियों को भी एक तरफ रखकर अपने चहेतों को जिला योजना समिति में नामांकन कराया है, एक गुट की ओर से भाजपा, बसपा, निर्दलीय और कांग्रेस पार्टी समेत 21 का नामांकन कराया गया है। जबकि दूसरे गुट की ओर से भी 15 सदस्यों का नामांकन कराया गया है। एक गुट सत्ताधारी कांग्रेस विधायक हैं तो दूसरा गुट पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि डीपीसी के इस चुनाव में कौन सा गुट किस पर भारी पड़ता है। बसपा के सबसे अधिक सदस्य होने के बावजूद डीपीसी चुनाव में पार्टी कहीं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।
क्रास वोटिंग की चिंता
एक गुट की ओर से पहले चुनाव निर्विरोध कराने की तैयारी की जा रही थी। ऐसे दावे भी गुट के नेता की ओर से किए जा रहे थे, लेकिन अब चुनाव निर्विरोध नहीं होने से इस गुट की हवा निकल गई है। इससे क्रास वोटिंग की चिंता सता रही है। विरोधी गुट क्रास वोटिंग कर चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक गोटियां फिट करने को जोर लगाए हुए हैं।
विपक्षी भी बने प्रस्तावक
छत्तीस का आंकड़ा रखने वाली कांग्रेस एवं भाजपा में नगर निगम में उल्टी ही गंगा बह रही है। यहां डीपीसी चुनाव में नगर निगम से एक सदस्य के चुनाव में भाजपा के नगर मंडल पदाधिकारी कांग्रेसी पार्षद किरण भाटिया के प्रस्तावक बन गए हैं तो कांग्रेसी पार्षद बबली चौधरी भाजपा पार्षद प्रद्युमन की प्रस्तावक बनी हैं।