रुड़की। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब प्रदेश में एनजीटी के आदेशों पर अमल करना शुरू हो गया है। प्रदूषण बोर्ड मुख्यालय की ओर से गंगा मैली कर रहे हरिद्वार के आठ होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। मानकों का पालन नहीं होने पर इन पर बंदी की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह कदम उन बड़े होटलों के खिलाफ उठाया गया है जिनकी क्षमता 50 कमरों से अधिक की है।
गौरतलब है कि एनजीटी की ओर से गंगा मैली कर रहे हरिद्वार जिले के करीब 525 होटलों को बंद करने के आदेश विगत वर्ष दिसंबर में दिए गए थे। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पीछे हटती रही। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चरणबद्ध तरीके से होटलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत पहले चरण में बुधवार को हरिद्वार के आठ होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके तहत 15 दिन के भीतर प्रदूषण मानकों को पूरा नहंी करने पर इन पर बंदी की कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कहने को तो 525 होटल हैं।
लेकिन इनमें 50 कमरों से अधिक क्षमता के 12 होटल ही हैं। जबकि 20 से 50 कमरों की क्षमता वाले करीब 50 होटल हैं। इसके अलावा सबसे अधिक 325 होटल बहुत छोटे स्तर के हैं। इनमें 20 कमरों से भी कम की क्षमता है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। ताकि छोटे होटल खुद ही मानकों को पूरा कर लें। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल ने बताया कि बोर्ड मुख्यालय की ओर से हरिद्वार में आठ होटलों को नोटिस जारी कर दिया गया है। निर्धारित समय पर मानक पूरा न किए जाने पर इनकी बंदी की कार्रवाई होगी।
20 होटलों ने हासिल की अनुमति
- कार्रवाई के डर से जिले में 20 होटलों ने प्रदूषण बोर्ड में आवेदन कर अनुमति हासिल कर ली है। क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल के अनुसार हरिद्वार में आठ होटलों को अनुमति दी गई है। जबकि रुड़की में 12 होटलों को अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा हरिद्वार के सात होटलों के आवेदन विचाराधीन चल रहे हैं।