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Roorkee News: हाथों के हुनर से बढ़ी आय, महिलाएं बन रहीं सशक्त

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूह अहम भूमिका निभा रहे हैं। रुड़की ब्लॉक में इन समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदलकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। कोई घर से अचार बनाकर बेच रही है तो कोई मछली के पकौड़े, सिलाई, कॉस्मेटिक और बेकरी के कारोबार से अपनी पहचान बना रही है। इन महिलाओं ने न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।
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सुनीता ने घर की रसोई से अचार बनाने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके उत्पादों को बाजार मिलने लगा और यह काम कारोबार में बदल गया। आज सुनीता हर माह करीब 25 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं। उनके इस प्रयास ने साबित किया है कि घरेलू हुनर को सही रास्ता देकर अच्छी आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है।
वहीं कल्पना ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मछली के पकौड़े बनाने और बेचने का कारोबार शुरू किया। उनके उत्पादों की मांग बढ़ने से कारोबार भी आगे बढ़ा। वर्तमान में वह हर माह करीब 40 से 50 हजार रुपये कमा रही हैं। साथ ही उन्होंने चार अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया है। इससे दूसरी महिलाओं को भी आय का साधन मिल रहा है।
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सुरेखा सिलाई और कॉस्मेटिक का काम करके हर माह करीब 15 से 20 हजार रुपये कमा रही हैं। वहीं, साक्षी ने बेकरी के कारोबार में अपनी पहचान बनाई है। उनका कारोबार हर माह करीब दो से तीन लाख रुपये तक पहुंच रहा है। इन महिलाओं की सफलता से क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित हो रही हैं। छोटे कारोबार के जरिये महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
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