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सरकारी गाड़ियों व बाइकों से जीपीएस हुए गुमशुदा

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बेहतर पुलिसिंग के लिए सरकारी गाड़ियों और बाइकों में लगाए गए ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) गुमशुदा हो गए हैं। उनकी तलाश न तो अधिकारी कर रहे हैं और न ही थाने-कोतवाली वाले। ऐसे में शासन की बेहतर पुलिसिंग की मंशा खटाई में पड़ गई है।
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सरकार के आदेश पर पुलिस अधिकारियों से लेकर थाने और कोतवाली की गाड़ियों में जीपीएस लगाए गए थे। चेतक बाइकों को भी जीपीएस से लैस किया गया था। शासन की मंशा थी कि जीपीएस से मिलने वाली लोकेशन पर जीपीएस ट्रेकर के जरिये एसएसपी, एसपी सिटी समेत अन्य अधिकारी थाने और कोतवाली की गाड़ियों व चेतक पुलिस पर नजर रख सकेंगे। साथ ही लापरवाही करने वालों पर नजर रखी जा सकेगी और कार्रवाई की जाएगी लेकिन शासन की यह मंशा कुछ ही दिन परवान चढ़ पाई। कुछ माह तक गाड़ियों और बाइकों में जीपीएस लगे रहे लेकिन अब गुमशुदा हो गए हैं। किसी भी गाड़ी और बाइक पर जीपीएस दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है लेकिन वे जानकारी होने के बाद भी अनजान बने हुए हैं। नतीजा, थाने और कोतवाली में ड्यूटी पर लापरवाही बरती जा रही है।
जीपीएस से ये थे लाभ
जीपीएस से पुलिसिंग में भी बदलाव देखने को मिला था। इससे जहां पुलिसकर्मियों की पल-पल की लोकेशन अधिकारियों को मिल रही थी, वहीं पुलिसकर्मी किसी सूचना के कितनी देर बाद घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं, इसका रिकॉर्ड भी दर्ज किया जा रहा था। अब जीपीएस मुमशुदा है तो किसी की कोई लोकेशन नहीं मिल रही है।
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...तो खुद ही हटाए गए हैं सिस्टम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोतवाली, थानों के चार और दो पहिया वाहनों में लगाए गए जीपीएस खुद ही हटाए गए हैं। इन्हें हटाने के पीछे मकसद साफ है कि अधिकारी इनकी लोकेशन पर नजर न रख सकें। वह ड्यूटी पर हैं या नहीं, इसकी भी जानकारी अधिकारियों को न मिले। यही वजह है कि पुलिसकर्मी क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान कहीं भी घूम रहे हैं।
जीपीएस सिस्टम हटाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो यह गंभीर है। इस बाबत सभी थाना और कोतवाली प्रभारियों से जानकारी ली जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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-प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात
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