रुड़की। चुनाव आयोग की ओर से चुनाव में लगे मतदान कर्मियों को खाने-पीने से लेकर कई व्यवस्थाओं के लिए पैसा दिया, लेकिन अधिकांश गांवों में ग्रामीणों की ओर से ही यह सभी व्यवस्थाएं कर दी गईं। जिससे मतदान कर्मियों का सारा पैसा जेबों में ही जैसे का तैसा रह गया।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए लगाए गए कर्मचारियों को तीन श्रेणी में बांटकर खाने-पीने की खातिर चुनाव आयोग ने बजट तय किया है। जिसमें मतदान कर्मियों कर्मियों को दो दिन का भोजन, नाश्ता, यात्रा भत्ता दिया जाता है। हालांकि इसमें यात्रा भत्ता अलग से बिल भेजे जाने पर बाद में दिया जाता है, लेकिन खाने-पीने के पैसे मतदान केंद्रों पर पहुंचते ही मिल जाते हैं।
इनमें पीठासीन अधिकारी को 850 रुपये और प्रथम, दूसरे एवं तृतीय मतदान कर्मी को 750-750 रुपये दिए जाते हैं, वहीं चतुर्थ मतदान कर्मचारी को 550 रुपये दिए जाते हैं। अधिकांश गांवों में पोलिंग पाटियों की सारी व्यवस्था ग्रामीणों की ओर से ही कर दी गई। ग्रामीणों की ओर से रात में सोने से लेकर खाने-पीने की व्यवस्था ग्रामीणों की ओर से ही कर दी गई। पुलिसकर्मियों भी इससे अछूते नहीं रहे। ग्रामीणों के सेवापानी से मतदान कर्मियों की मौज तो रही ही, वहीं इससे मतदान कर्मचारियों के सारे पैसे भी बच गए।