अलविदा जुम्मा की नमाज अदा करते अकीदतमंद
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शहर से देहात तक शुक्रवार को मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई। हजारों अकीदतमंदों ने देश और प्रदेश में अमन शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद तकरीर में उलेमाओं ने ईद से पहले जकात और फितरा निकालने को सुन्नत बताया। दूसरी ओर कलियर में भी रमजान के आखरी जुमे की नमाज अकीदतमंदों ने शिद्दत से अदा की।
शहर की प्रमुख जामा मस्जिद में मुफ्ती मो. सलीम ने अलविदा जुमे की नमाज अदा कराई। मौलाना अजहरुल हक ने कहा कि रमजान की तीसरा असरा चल रहा है। ऐसे में अकीदतमंदों को ईद से पहले जकात और फितरा निकाल देना चाहिए। जकात हर उस मुसलमान पर फर्ज है जिसके पास साढ़े 52 तोला चांदी या इसके बराबर की राशि हो। उन्होंने कहा कि फितरा की राशि प्रति व्यक्ति 30 रुपये निर्धारित की गई है। मौलाना अरशद कासमी ने रोजे के महत्व पर प्रकाश डाला।
मदरसा इरफानुल उलूम के मौलाना नसीम अहमद कासमी, मदरसा दारुस्सलाम के कारी शमीम अहमद, मदरसा मिस्बाहउल उलूम के मौलाना मुसर्रत अली ने जकात वाजिब होने के बाद भी अदा न करने को गुनाह व रुसवाई का सबब बताया। शहर की सिविल लाइंस मस्जिद, शेख बंधा मस्जिद, अंबर तालाब मस्जिद, आजाद नगर मस्जिद, रामपुर चुंगी स्थित मस्जिद में भी अकीदतमंदों ने अलविदा जुमा की नमाज अदा कर दुआ मांगी।
कलियर स्थित साबरी जामा मस्जिद व आसपास की मस्जिदों में भी अलविदा जुमा पर सुबह से ही बड़ी तादाद में अकीदतमंद पहुंचना शुरू हो गए थे। दोपहर 12 बजे तक हालात यह थे कि साबरी जामा मस्जिद में भारी भीड़ हो गई थी। बाद में अकीदतमंदों ने बाजारों में सड़कों पर रमजान के आखिरी जुमे की नमाज अदा की। साबरी जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज सऊद साबरी व मरकज वाली मस्जिद के पेश इमाम मौलवी जाकिर ने नमाजियों को जुमे की नमाज अदा कराई।