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.. तो इस चुनाव में 4600 करा रहा मित्र पुलिस की ही %मुखबिरी%

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कहीं 4600 ग्रेड पे को लेकर पुलिसकर्मियों में नाराजगी तो नहीं। यह जानना राजनीतिक पार्टियों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों के लिए भी जरूरी हो गया है। चुनावी माहौल में पार्टियों में भी यह जानने की उत्सुकता है कि क्या अब भी ग्रेड पे को लेकर पुलिसकर्मियों में नाराजगी है। ऐसे में सही प्रतिक्रिया मिलती है कि एक पक्ष मतदान से पहले इस नाराजगी को दूर करने की जुगत करेगा तो वहीं दूसरा पक्ष इसे भुनाने की कोशिश में होगा। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के आला अधिकारियों ने खुफिया विभाग को इसकी जानकारी जुटाकर रिपोर्ट भेजने को कहा है। वहीं चूंकि यह जांच गुपचुप और बेहद सतर्कता के साथ हो रही है इसलिए कोई भी अधिकारी इस पर जानकारी देने से बच रहे हैं।
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आज के दौर में भी पुलिस मुखबिरों पर निर्भर है। पुलिस मुखबिरों की सूचना पर अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाती है लेकिन अगर पुलिस की ही मुखबिरी की जाने लगे तो ये अचरज की बात है। वर्तमान में कुछ ऐसा ही हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि 4600 ग्रेड-पे लागू न होने से पुलिस कर्मियों की नाराजगी को देखते हुए उनकी गुपचुप तरीके से मुखबिरी की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि पुलिस कर्मियों की नाराजगी चुनाव पर असर डाल सकती है। इसे लेकर पुलिस अधिकारी भी लगातार प्रतिक्रिया ले रहे हैं।
विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा होने से पहले प्रदेश के पुलिस कर्मियों को उम्मीद थी कि उनका 4600 ग्रेड-पे लागू हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसे लेकर पुलिसकर्मियों में नाराजगी थी। इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों के परिवार वालों ने देहरादून से लेकर रुड़की में प्रदर्शन भी किए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों ने जमकर भड़ास निकाली थी। इसे देखते हुए चुनाव में इस बार दूसरों की मुखबिरी कराने वाली मित्र पुलिस की ही मुखबिरी कराई जा रही है। सूत्रों के अनुसार शासन और पुलिस अधिकारियों की ओर से खुफिया विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं कि चुनाव में पुलिसकर्मियों और उनके परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। साथ ही चुनाव को लेकर उनके भीतर क्या चल रहा है, इसे भी जाना जाए। दून में बैठे पुलिस अधिकारियों को फीडबैक भी दिया जा रहा है। संवाद
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सोशल मीडिया ग्रुप पर भी पैनी नजर
पुलिस कर्मियों के 4600 ग्रेड-पे लागू न होने को लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। खुफिया विभाग पुलिस कर्मियों के बने व्हाट्सएप ग्रुपों पर लगातार नजर रख रहा है। साथ ही गुपचुप तरीके से सोशल मीडिया पर ग्रेड-पे से संबंधित तैर रहे मीम्स और फोटो की भी जानकारी ले रहा है।
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