आईआईटी रुड़की की महात्मा गांधी केंद्रीय लाइब्रेरी में बड़ा गोलमाल सामने आया है। स्थिति यह है कि किताबों की सुरक्षा के लिए लाइब्रेरी में निफ्टी-7 साफ्टवेयर लगाया गया है, जिसके एनवल मेंटेनेंस की जिम्मेदारी लिबसिस कंपनी को दी गई है, लेकिन पिछले वर्ष न तो एनवल मेंटेनेंस के लिए कंपनी का कोई प्रतिनिधि आया और न ही कार्य हुआ। इसके बावजूद उसे 2.5 लाख का भुगतान कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद जांच और कार्रवाई की बात की जा रही है।
आईआईटी रुड़की स्थित महात्मा गंाधी केंद्रीय लाइब्रेरी का शहर में ही नहीं बल्कि देश में भी नाम है। यहां करीब चार लाख किताबों का स्टॉक है। इसकी सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रानिक गेट की व्यवस्था की गई है। इसका फायदा यह है कि अगर बिना लाइब्रेरी प्रबंधन की अनुमति और इश्यू किए बिना कोई किताब चोरी छिपे बाहर जाएगी तो अलार्म बज उठेगा। इसके लिए निफ्टी-7 साफ्टवेयर लगाया गया है।
साथ ही इसके सालाना मेंटेनेंस की जिम्मेदारी लिबसिस कंपनी की दी गई है। इसके लिए कंपनी को सालाना करीब 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया जाता रहा है, लेकिन पिछले साल एएमसी यानी एनवल मेंटेनेंस कांस्ट्रैक्ट के लिए न तो आईआईटी लाइब्रेरी प्रबंधन की ओर से कोई टेंडर किया गया और न ही कोई इसे देखने या काम करने के लिए आया। कारण कि इस संबंध में कोई विजिटिंग रिपोर्ट दर्ज नहीं है। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से भुगतान कर दिया गया।
क्या कहते हैं पुस्कालयाध्यक्ष
इस संबंध में आईआईटी रुड़की के लाइब्रेरियन डा. सी जयकुमार का कहना है कि मैनें अभी हाल ही में यहां ज्वाइन किया है। फिलहाल मुझे यहां की अधिक जानकारी नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि यह एक अच्छी लाइब्रेरी है। इसकी बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही पूरी जानकारी के बाद इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नाम बड़े और दर्शन छोटे!
नाम बड़े और दर्शन छोटे! यह कहावत आईआईटी रुड़की की लाइब्रेरी पर सटीक बैठती है। कहने को तो यह सेंट्रल लाइब्रेरी है पर रखरखाव और देखरेख के अभाव में इसका हाल बेहाल है। स्थिति यह है कि बेसमेंट के कई कमरों की सीलिंग गिरी पड़ी है और लाखों रुपये की किताबें कबाड़ बन गई हैं। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से सुध नहीं ली जा रही है।
वर्ष-2007 में आईआईटी रुड़की की केद्रीय लाइब्रेरी को नए भवन में शिफ्ट किया गया। साथ ही इसका नाम महात्मा गांधी केंद्रीय पुस्तकालय रखा गया। वर्तमान में इसमें करीब चार लाख किताबें हैं। प्रतिदन सैकड़ों की संख्या में आईआईटी के छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन के लिए आते हैं, लेकिन बाहर से दिखने वाली भव्य लाइब्रेरी में ऊपर से तो सब कुछ ठीकठाक नजर आ रहा है। यही नहीं छात्रों के स्टडी के लिए भी अच्छी व्यवस्था है, लेकिन बेसमेंट के अधिकांश रूम बदहाल हैं, जहां लाखों की किताबें कबाड़ की तरह रखी गई हैं। यही नहीं ऊपर की सीलिंग भी उधड़ी हुई है।