हरिद्वार जिला कारागार से दो कैदियों की फरारी ने रुड़की उपकारागार पर बंदी फरारी के लगे दागों को फिर से ताजा कर दिया है। दरअसल, रुड़की उपकारागार से भी एक साथ पांच बंदी फरार हो चुके हैं। इसके अलावा तीन अन्य बंदी भी फरार हो चुके हैं। रुड़की उपकारागार पर जेलर हत्याकांड से लेकर गैंगवार के दाग भी लग चुके हैं।दरअसल, हरिद्वार जिला कारागार की तरह कैदियों के फरार होने की घटनाएं रुड़की उपकारागार में हो चुकी हैं। 31 मई वर्ष 2005 को पहली बार बंदी फरार होने से रुड़की उपकारागार सुर्खियों में आई थी। जेल से एक साथ पांच बंदी दीवार फांदकर फरार हो गए थे। हालांकि, बाद में सभी बंदी पकड़े गए थे। इस घटना के दो साल बाद ही एक बंदी फिर से फरार हो गया था। इसके कुछ दिनों बाद दो बंदी और फरार हो गए थे।
इसके अलावा वर्ष 2011 में डिप्टी जेलर नरेंद्र खंपा की हत्या से रुड़की उपकारागार के दामन पर कभी न मिटने वाला दाग लगा था। इसके बाद बाद वर्ष 2014 में गैंगवार की घटना हुई थी। जिसमें बदमाश चीनू पंडित के तीन साथी मारे गए थे। इस पूरे मामले में उस समय जेल में बंद रहे बदमाश सुनील राठी का हाथ था। जबकि गैंगवार में तत्कालीन जेलर राकेश वर्मा का नाम भी सामने आया था। जिसके बाद जेलर पर कार्रवाई हुई थी।
इस गैंगवार ने देशभर में रुड़की जेल की किरकिरी कराई थी। तभी से रुड़की उपकारागार अतिसंवेदनशील मानी जाती है और अधिकारियों की पैनी नजर रहती है। अब हरिद्वार की घटना के बाद रुड़की उपकारागार में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बंदियों की गतिविधियों पर ध्यान रखने के अलावा उनसे मिलाई पर आने वाले लोगों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।