नोटबंदी का हवाला देकर ठेकों का बकाया माफ करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक ने ठेकेदारों की मंशा पर पानी फेर दिया है। अब ठेकेदारों को दरगाह प्रबंधन को तीन करोड़ 95 लाख 14 हजार रुपये की बकाया धनराशि जारी करनी होगी। उधर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद दरगाह प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। दरगाह प्रबंधक की ओर से ठेकेदारों को बकाया धनराशि जमा करने के लिए नोटिस भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि पिरान कलियर शरीफ में हर साल प्रसाद, तहबजारी, वाहनों की पार्किंग, शौचालय आदि के लिए हर साल करोड़ों रुपये के ठेके छोड़े जाते हैं। इनमें ठेकेदारों को सबसे ज्यादा कलियर उर्स में आमदनी होती है। लेकिन इस बार कलियर उर्स में नोटबंदी के चलते कारोबार मंदा ही रहा है। इसके चलते प्रदेश सरकार की ओर से ठेकेदारों पर बकाया करीब तीन करोड़ रुपये माफ किए गए थे। जिसे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका में चुनौती दी गई थी। अब हाईकोर्ट ने सरकार के बकाया माफ करने के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश ने नोटबंदी की आड़ में करोड़ों रुपये माफ कराने की ठेकेदारों की मंशा पर पानी फेर दिया है। इसे ठेकेदारों के लिए करारा झटका माना जा रहा है। इस आदेश के बाद ठेकेदारों में हड़कंप की स्थिति है। बताया गया है कि दरगाह में आठ-नौ ठेकों पर बकाया चल रहा था।
दरगाह प्रबंधक आरिफ रशीद का कहना है कि बकाया माफी के लिए दरगाह की ओर से शासन को प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों पर दरगाह का तीन करोड़ 95 लाख 14 हजार रुपये का बकाया चल रहा है। इस बकाया रकम को वसूलने के लिए ठेकेदारों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
उत्तराखंड आपदा में भी माफ हुए थे करोड़ों रुपये
- ऐसा पहली बार नहीं है जब ठेकेदारों को करोड़ों रुपये माफ करने की कोशिश हुई है। वर्ष 2013 में दरगाह प्रबंधन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जिसके बाद ठेकेदारों पर एक करोड़ 28 लाख रुपये माफ किए गए थे। यह धनराशि ने दरगाह प्रबंधन ने अपने राजस्व से दी थी। दरगाह प्रबंधन की ओर से शासन से यह रकम लेने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। लेकिन इस बार ठेकेदारों को बकाया माफ करने की मंशा पर पानी फिर गया है।