एक किसान पर चकबंदी अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर अपनी जमीन बढ़वाकर उसे बेचने का एग्रीमेंट करने का आरोप लगा है। यही नहीं, आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद चकबंदी विभाग ने कुल जमीन किसान के नाम कर दी। गांव के एक वकील ने एसडीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। एसडीएम ने जिला बंदोबस्त अधिकारी को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
दाबकी गांव निवासी वकील सतेंद्र चौधरी ने एसडीएम को शिकायती पत्र देकर बताया कि गांव के एक किसान को पूर्व में भू प्रबंध समिति ने 0.247 हेक्टेअर जमीन का पट्टा दिया था, लेकिन कुछ दिनों पहले गांव में चकबंदी शुरू हुई थी। आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने किसान की जमीन लगभग चार गुना बढ़ाकर कागजों में दर्ज कर दिया। इतना ही नहीं किसान ने जमीन दो लोगों को बेचने का एग्रीमेंट भी कर दिया। शिकायत पर चकबंदी विभाग ने जांच की और किसान का मूल रकबा 0.247 दोबारा दर्ज कर दिया। इसके बाद सतेंद्र ने एग्रीमेंट रद्द करने के लिए सिविल जज जेडी के कोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट ने किसान के मूल रकबे से भूमि की बिक्री पर रोक लगा दी थी।
सतेंद्र ने कोर्ट का आदेश चकबंदी विभाग को दिया था। आरोप है कि चकबंदी विभाग ने सरकारी जमीन खुर्दबुर्द करने के उद्देश्य से किसान के नाम पर 1.3092 हेक्टेयर भूमि दर्ज कर दी है। आरोप है कि दो दिन पूर्व निरस्त एग्रीमेंट के आधार पर भूमि का बैनामा कराने की कोशिश की गई, लेकिन सतेंद्र ने कोर्ट के आदेश सब रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किए, जिसके बाद बैनामे पर रोक लगा दी गई। एसडीएम पूरण सिंह राणा ने बताया कि इस मामले में जिला बंदोबस्त अधिकारी को जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। उधर, सहायक बंदोबस्त अधिकारी दीवान सिंह नेगी का कहना है कि इस तरह की फिलहाल जानकारी नहीं है। किसी को आपत्ति है तो हर सोमवार को शिकायत दर्ज करा सकते है।