सिविल अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को एक फर्जी डाक्टर मरीजों का उपचार करता मिला। लेकिन प्रबंधन को भनक तक नहीं लगी। कुछ लोगों की शिकायत पर स्टाफ ने संबंधित डाक्टर से पूछताछ की तो हकीकत सामने आई। खुद को फंसता देख आरोपी डाक्टर मौके से भागने लगा। लेकिन अस्पताल कर्मियों ने उसे दबोच लिया। इसी बीच आरोपी के विरोध में मरीज और तीमारदार भी लामबंद हो गए। बाद में लिखित माफीनामे देने पर उसे छोड़ दिया गया।
सिविल अस्पताल में इन दिनों बुखार से पीड़ित मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। ओपीडी के दौरान संविदा पर तैनात चिकित्सक नितीश कुमार वीआईपी ड्यूटी में गए हुए थे। उनकी जगह पर एक अन्य व्यक्ति मरीजों का उपचार कर रहा था। डाक्टर की कुर्सी पर बैठकर और आला लगाकर वह मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहा। इस दौरान जब किसी ने उससे पूछताछ की तो वह हड़बड़ा गया। मामला तूल पकड़ने पर अस्पताल के कर्मचारी भी मौके पर जमा हो गए। अस्पताल कर्मियों को देखकर संबंधित युवक डॉक्टर के बैठने के स्थान से खिसकने लगा। लेकिन कुछ कर्मियों ने उसे रोक दिया और पूछताछ शुरू कर दी।
इसी बीच उसने सीएमएस की अनुमति से बैठने की जानकारी दी। सीएमएस के मना करने पर वह कभी किसी फार्मेसिस्ट तो कभी संबंधित कक्ष में बैठने वाले डॉक्टर से अनुमति लेने की बात कहने लगा। भीड़ के सवालों में उलझता देखकर उसने भागने का प्रयास किया, लेकिन कर्मियों ने दबोचा लिया। इस दौरान करीब आधा घंटा अस्पताल में हंगामा होता रहा। अधिकतर मरीजों ने फर्जी डाक्टर पर बाहर की दवाइयां लिखने का आरोप लगाया। पूछताछ में उसने अपना नाम जावेद पुत्र रसीद निवासी मंगलौर बताया। यह भी बताया गया कि वह वर्तमान में गुरुकुल कांगड़ी विवि में बीएएमएस अंतिम वर्ष का छात्र है और डॉक्टर नितिश कुमार के कहने पर मरीजों का इलाज कर रहा था। इस संबंध में सीएमएस को संबोधित माफीनामा लिखवाने के बाद आरोपी को छोड़ दिया गया।
क्या कहते हैं कार्यवाहक सीएमएस
सिविल अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डा. एमएमपी सिंह का कहना है कि कक्ष नंबर-28 में एक व्यक्ति डाक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों को दवा लिख रहा था। संबंधित चिकित्सक से इसके लिए अनुमति ली गई थी। आरोपी से माफीनामा लिखवाने के बाद छोड़ दिया गया है। चिकित्सक से पूछताछ और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।