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बिजली संकट से निजात की आस

Tue, 22 Mar 2016 12:10 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
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रुड़की। राज्य के देहात क्षेत्रों में लग रहे सोलर प्लांट से बिजली संकट से निजात की आस जग गई है। इसके तहत रुड़की से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक सोलर प्लंाट लगाए गए हैं। 31 मार्च से इनसे उत्पादन शुरू हो जाएगा।
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केंद्र सरकार की ओर से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सोलर प्लांट योजना शुरू की गई है। इसके तहत रुड़की से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार नए-नए सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक एक दर्जन से अधिक प्लांट लग चुके हैं। इनमें से कुछ सोलर प्लांटों से इस माह के अंत से उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। अधिकतर सोलर प्लांट एक और दो मेगावाट के हैं। चुड़ियाला, भलस्वागाज, मंगलौर, नारसन, डाडा जलालपुर में स्थापित सोलर प्लांटों से लगभग 80 मेगावाट बिजली उत्पादन की उम्मीद है। उरेडा अधिकारियों के अनुसार उम्मीद है कि 31 मार्च से करीब 24 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

छोटे प्लांट में मिलती है सब्सिडी
500 किलोवाट तक का सोलर प्लांट लगाने पर सरकार की ओर से 30 से 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। जबकि एक मेगावाट या इससे अधिक के प्लांट पर कोई छूट नहीं दी जा रही है। योजना के तहत ऊर्जा निगम प्लांट से निकलने वाली बिजली खरीदता है। इसके एवज में प्लांट संचालक को सवा चार रुपये लेकर सवा छह रुपये प्रति यूनिट तक भुगतान किया जाता है।
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कम बोली लगाने वाले को मिलता है टेंडर
उरेडा की ओर से बड़े सोलर प्लांट के लिए कम बोली लगाने वाले को टेंडर दिया जाता है। यही कारण है कि पहले प्लांट मालिकों की प्रति यूनिट बिजली 16 रुपये तक खरीदी जाती थी। लेकिन अब यह घटकर छह रुपये तक रह गई है।

एक मेगावाट पर आता है आठ करोड़ खर्च
एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने में तकरीबन छह करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा इसके लिए करीब 30 बीघा जमीन की जरूरत रहती है।

क्या कहते हैं ऊर्जा निगम अधिकारी
ऊर्जा निगम ग्रामीण खंड के अधिशासी अभियंता एके मिश्रा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 15 सोलर प्लांट लगाए गए हैं। इनसे 80 मेगावाट यूनिट तक बिजली मिलने की उम्मीद है।
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