यह जान सकेंगे कि किस ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता कितनी है और कौन से ग्रुप का रक्त है। इसके लिए राज्य में ई-ब्लड बैंकिंग की तैयारी चल रही है। उम्मीद है एक माह के भीतर ई-ब्लड बैंकिंग सेवा शुरू हो जाएगी।
रुड़की, हरिद्वार और देहरादून समेत प्रदेश में इस समय लगभग 13 सरकारी ब्लड बैंक संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी को ई-ब्लड बैंकिंग से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत सभी सरकारी ब्लड बैंकों का पोर्टल डेवलप किया जाएग। इसके माध्यम से आप घर बैठे ब्लड बैंकों की उपलब्धता जान सकेंगे। आपको यह भी जानकारी मिलेगी कि रुड़की ब्लड बैंक में ब्लड की कितनी उपलब्धता है और किस-किस ग्रुप के कितना यूनिट ब्लड बचा हुआ है। उसी प्रकार हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर समेत पहाड़ों में चल रहे ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता की जानकारी भी आनलाइन मिलेगी। ऐसे में न सिर्फ मरीज और तीमारदारों को राहत मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार का भी काम आसान हो जाएगा। दरअसल कई बार रेयर ब्लड ग्रुप नहीं मिलने से तीमारदारों को खून के लिए एक शहर से दूसरे शहर भटकना पड़ता हैं। ऐसे में लेट-लतीफी से कई बार मरीज की जान भी चली जाती है। लेकिन ई-ब्लड बैंकिंग सेवा शुरू होने से लोगों को राहत मिलेगी।
इस संबंध में रुड़की सिविल अस्पताल के कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संजय कंसल का कहना है कि सोमवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित बैठक के दौरान ई-ब्लड बैंकिंग सेवा जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए जोर शोर से तैयारी चल रही है। उम्मीद है अगले एक माह के भीतर प्रदेश में ई-ब्लड बैंकिंग सेवा शुरू हो जाएगी।
आईएमए और जौलीग्रांट ब्लड बैंक शामिल नहीं
ई-ब्लड बैंकिंग के तहत प्रदेश के सरकारी ब्लड बैंकों को शामिल किया जाएगा। इसमें आईएमए ब्लड बैंक देहरादून और जौलीग्रांट ब्लड बैंक शामिल नहीं किया जाएगा।
अस्पतालों में निशुल्क होंगी 30 जांच
सरकारी अस्पतालों में 30 जांचों को निशुल्क करने के लिए भी प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारी चल रही है। रुड़की सिविल अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डा. संजय कंसल का कहना है कि बीते रोज स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित बैठक के दौरान निशुल्क जांच सेवाएं शुरू करने पर भी जोर दिया है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में एक्सरे सहित ब्लड की अधिकतर जांच निशुल्क कराई जा सकेगी। इसे भले ही अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग पर आर्थिक बोझ पड़ेगा, लेकिन जरूरतमंद मरीजों को राहत मिलेगी।