चार साल पहले जहां से उठी डोली वहीं से अर्थी
रुड़की। लाडली बेटी की जिस घर से चार साल पहले धूमधाम से डोली उठी, उसी घर से देश की प्रतिभावान बेटी की उतने ही गम के साथ अर्थी भी उठ गई। माता-पिता ने बेटी के ससुरालियों पर दहेज की खातिर उसे प्रताड़ित कर दुनिया छोड़ने के लिए विवश करने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से इंसाफ के लिए स्पेशल जांच सेल से जांच की गुहार लगाई है।
रामगंगा कुंज, आदर्शनगर निवासी मृतक बेटी के पिता सुरेशचंद शर्मा एवं माता ललिता शर्मा ने अपने आवास पर प्रेस वार्ता में बताया कि उनकी बेटी डा. नीति भार्गव की शादी नवंबर 2012 में गाजियाबाद के आशुतोष गौतम के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के तीन दिन बाद ही ससुरालियों की ओर से दहेज के लिए उसे तंग किया जाने लगा था। दहेज न देने पर सास, ससुर एवं पति ने मारपीट कर घर से बाहर निकालने पर कोतवाली सिविल लाइंस में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन कुछ लोगों हस्तक्षेप के बाद समझौता होने से नीति अपने ससुराल चली गई। आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने से आरोपी उससे दुश्मनी रखने लगे थे। उनके दामाद आशुतोष एक मेडिकल व्यवसाय में कार्यरत हैं। खुद इलाज करने का बहाना करते हुए उसने नीति को एक इंजेक्शन लगाया। उसके बाद से नीति अधिक बीमार रहने लगी। उसके बाद ससुराली उसे घर छोड़ गए। उन्होंने उसका दिल्ली, मेरठ, देहरादून इलाज कराया, लेकिन उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। जिसके चलते उसने 24 फरवरी 2016 में देहरादून एक हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया।
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भूकंप के पूर्वानुमान पर रिसर्च कर पाई थी ख्याति
माता-पिता का कहना है कि डा. नीति भार्गव उनके परिवार में पहली ऐसी लड़की थी जिसने उच्चशिक्षा प्राप्त की थी। उनके परिवार में अभी तक बेटियों को शिक्षा के लिए बाहर नहीं भेजते थे। उन्होंने बताया कि नीति ने आईआईटी रुड़की से अर्थ क्वेक यानी भूकंप पूर्वानुमान पर रिसर्च कर ख्याति पाई थी।
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मरने से पहले लिखा था दर्दभरा बयां
नीति के माता-पिता ने बताया कि मरने से पहले नीति ने ससुरालियों की प्रताड़ना की पीड़ा लिखकर बयां की थी। लिखा था....‘कृप्या करके मुझे गाजियाबाद मत भेजना, मेरी सास, पति और ससुर लालची, कंजूस, घमंडी, जंगली के समान व्यवहार करने वाले व मेरे साथ उनका व्यवहार किसी जल्लाद से भी भयानक है। भगवान करे कि उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो। मुझे इन जल्लादों के बीच वापस मत भेजना। वहां ससुराल में दुश्मनों के हाथों में मरना नहीं चाहती। अगर वाकई में मेरी मौत का समय आया है तो हे भगवान किसी तरह मुझे ऐसा मौका और ऐसी हिम्मत दें कि मैं इन तीनों को अपने हाथों से गोली मार दूं। फिर मुझे फांसी हो जाए तो कम से कम जिल्लत भरी मौत अथवा जीवन से तो छुटकारा मिलेगा। मेरी यही मनोकामना है और कुछ नहीं...’ नीति भार्गव