रुड़की। उतर प्रदेश सरकार की ओर से हिंडन नदी का जलप्रवाह लौटाने की कवायद फिलहाल थमती नजर आ रही है। हाल में लखनऊ में हुई बैठक के बाद यूपी सरकार ने नदी के जीर्णोद्धार का काम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले यूपी सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी के जीर्णोद्धार के लिए सर्वे कराया था।
हिंडन उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके से निकलने वाला प्रमुख जलप्रवाह है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद जिले से होते हुए हिंडन का प्रवाह गौतमबुद्ध नगर स्थित गांव तिलवाड़ा के दक्षिण यमुना में जाता है। लेकिन पिछले दो दशकों से हिंडन नदी सूखी हुई है। आज हिंडन के नाम पर तमाम संस्थाएं और प्रतिष्ठान बनें हैं, लेकिन इसकी सुध नहीं ली गई। हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री की ओर से इसका जलप्रवाह लौटाने की घोषणा की। उससे लोगों में आस जगी। लेकिन एक बार फिर इस पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है। हाल ही में लखनऊ में उच्च अधिकारियों की बैठक के बाद यूपी सरकार ने हिंडन नदी के कायाकल्प का जिम्मा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अब नए सिरे से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हिंडन नदी के कायाकल्प को विजन तैयार किया जाएगा।
मालूम हो कि हिंडन का जलप्रवाह बंद होने और इसमें नाले सहित फैक्ट्रियों का गंदा और केमिकल युक्त पानी आने से मुजफ्फरनगर, शामली और बागपत के कई गांव में संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। इसको देखते हुए यूपी सरकार ने सिंचाई विभाग के समानांतर देवबंद ब्रांच की ओर से सर्वे कराया था। देवबंद ब्रांच के अधिशासी अभियंता केएम कंसल का कहना है कि लखनऊ में बैठक के बाद अब पॉल्यूशन नियंत्रण बोर्ड को इसका जिम्मा सौंपा गया है। वह नए सिरे से विजन तैयार कर रिपोर्ट देगा।