शहर में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वाले असहायों को अब पूरे साल छत मयस्सर हो सकेगी। अभी तक सिर्फ सर्दियों के मौसम में नगर निगम की ओर से अस्थायी रैन बसेरे की व्यवस्था की जाती था। मगर अब सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक नगर निगम स्थायी रूप से रैन बसेरा बनाएगा। इसके लिए सिविल लाइंस में गांधी वाटिका की जमीन पर विचार किया जा रहा है।
करीब 1.20 लाख की आबादी वाले रुड़की शहर में एक तबका ऐसा भी है जो खुले आसमान के नीचे रात गुजारता है। सर्दियों में इनके लिए अस्थायी रैन बसेरे की व्यवस्था की जाती है। जिसमें कंबल व अलाव का इंतजाम भी नगर निगम की ओर से किया जाता है। इस बार भी नगर निगम के बारात घर में रैन बसेरा बनाया गया।
असहाय लोगों की मजबूरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी तौर पर रैन बसेरे बनाने के आदेश नगर निगमों को दिए हैं। जिसके अनुपालन में रुड़की में भी जल्द स्थायी रैन बसेरा बनाए जाने की योजना है। इसके लिए शहर में नगर निगम की भूमि चिह्नित की जा रही है। फिलहाल गांधी वाटिका की जमीन पर भी विचार किया जा रहा है। कागजी कार्यवाई पूरी होने पर रैन बसेरे के तौर पर दो हॉल बनाए जाएंगे। जिससे पूरे साल असहाय और बेघर लोग सिर छिपा सकेंगे।