दो लाख रुपये एकमुश्त दिए जाने संबंधी आदेश को सिपाहियों के परिजनों ने लॉलीपॉप बताया है। परिजनों का कहना है कि मुख्यमंत्री खुद को सैनिक पुत्र कहते हैं। इस मामले में उन्होंने सैनिकों (सिपाहियों) का अपमान किया है। परिजनों का कहना है कि सिपाहियों इस मामले में सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की है। सूत्रों के मुताबिक कई सिपाहियों ने इस्तीफा दे भी दिया है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
आदेश के वायरल होते हुए सिपाहियों के परिवार की महिलाएं प्रेस क्लब पहुंची थीं। उन्होंने यहां पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके परिवार इस लॉलीपॉप को लेने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री ने ग्रेड पे की घोषणा 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस को की थी। पुलिस परिवारों की वाहवाही भी मुख्यमंत्री ने लूटी थी। उनकी इस घोषणा पर पुलिस परिजनों ने उन्हें सम्मानित भी किया था। लेकिन, अब जो आदेश जारी हुआ है उससे पुलिस परिवार आहत हुआ है। सैनिक पुत्र होते हुए उन्होंने प्रदेश के सैनिकों का अपमान किया है। इस मामले में महिलाओं का कहना है कि 2001 में भर्ती सिपाहियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की तैयारी कर ली है।
बता दें कि 2001 में सिपाहियों की पहली भर्ती थी। उस साल करीब 1500 सिपाही भर्ती हुए थे। इनमें से कुछ प्रमोशन पाकर हेड कांस्टेबल बन गए हैं। कुछ रैंकर्स परीक्षा पास कर दरोगा बन चुके हैं। वर्तमान इन सिपाहियों की संख्या की बात करें तो यह 790 हैं। प्रदेश में कई जगह सिपाहियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग करते हुए इस्तीफा दे भी दिया है। ऐसा पुलिस के परिजनों का कहना है। इस बारे में अभी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है।
17 से 20 ने दिया है इस्तीफा : सूत्र
इस आदेश के बाद सिपाहियों ने विरोध दर्ज कराने शुरू कर दिए हैं। इसे अनुशासित बल में सीधे तौर पर बगावत की शुरुआत माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि पूरे प्रदेश में शनिवार को ही 17 से 20 सिपाहियों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अभी कहीं इन इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो अभी मान मनौव्वल का दौर चल रहा है।