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दिल्ली, मथुरा के गहनों से गणेश-लक्ष्मी का शृंगार

Wed, 26 Oct 2016 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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Roorkee Dhanteras and Diwali in the market punished. - फोटो : amarujala
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दिवाली पर मथुरा और वृंदावन के गहनों से गणेश-लक्ष्मी का शृंगार किया जाएगा। इसके लिए बाजार में एक से बढ़कर एक मुकुट, मालाएं, कंगन, जड़ीदार लहंगे उपलब्ध हैं। इनमें चांदी और डायमंड की भी कलाकारी की गई है। विभिन्न वैरायटी और रेंज में उपलब्ध गहनों को शहरवासी हाथों हाथ ले रहे हैं।

इस समय लक्ष्मी-गणेश की शृंगार सामग्री से बाजार अटा पड़ा है। इनमें चांदी और डायमंड जड़ित गहने भी शामिल हैं। लोगों का कहना है जब खुद व्यक्ति सजने संवारने में पीछे नहीं रहता तो वर्ष में एक बार लक्ष्मी-गणेश के शृंगार में क्यों पीछे रहेगा। बाजार में उपलब्ध मुकुट, मालाएं, कंगन, बिंदी, पायल, जड़ीदार वस्त्र और लहंगे की विशेष डिमांड है। 50 रुपये से लेकर दो हजार से अधिक के यह गहने भक्तों को भी भा रहे हैं।
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अब मैटल के मुकुट का चलन
बीटी गंज स्थित मेन मार्केट के दुकानदार पंकज का कहना है कि पहले गत्ते के मुकुट का चलन था। लेकिन अब मैटल की भरमार है। लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं। इसकी कीमत 40 रुपये से लेकर 500 रुपये तक है। पहले ऊन की मालाएं आती थीं। उनकी कीमत 10 से 60 रुपये थी। अब इसकी जगह रीवन की मालाएं लोगों को पसंद आ रही हैं।

कई राज्यों से पहुंचे लक्ष्मी-गणेश
बाजारों में इस समय मेरठ, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, कलकत्ता, मद्रास, बनारस के गणेश-लक्ष्मी मौजूद हैं। अलग-अलग रेंजों में उपलब्ध उक्त मूर्तियां लोगों को लुभा रही हैं। जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही हैं इनकी डिमांड बढ़ती जा रही है। सिविल लाइंस स्थित दुकानदार आलोक खन्ना का कहना है कि मूर्तियों की रेंज 30 रुपये से लेकर 300 रुपये तक है। इसके अलावा बाजार में सोने-चांदी, स्फटिक और पारे की मूर्तियां भी उपलब्ध हैं।

ऐसे करें धनतेरस पूजा
धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जानी चाहिए। यह काल सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होता है और लगभग दो घंटे 24 मिनट रहता है। पंडित रामगोपाल पराशर के अनुसार धनतेरस पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है। इस दौरान स्थिर लग्न होता है। माना जाता है कि यदि स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाए तो लक्ष्मी घर में ठहर जाती है।

धनवंतरि जयंती भी मनाया जाता है
धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का दिन धनवंतरि त्रयोदशी या धनवंतरि जयंती जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है के रूप में भी मनाया जाता है।
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घर के बाहर जलाएं यम दीप
असामयिक मृत्यु से बचने के लिए इस दिन मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपक के नाम से जाना जाता है। इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।
इनसेट
प्रदोष काल मुहूर्त
धनतेरस पूजा मुहूर्त ... शाम 5.30 बजे से शाम 6.20 मिनट तक
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