मूक-बधिर और दिव्यांगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीजापुर गेस्ट हाउस में मुलाकात कर मुख्यमंत्री को तीसरी बार ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मूक बधिरों की पीड़ा को समझने और एक सशक्त आयोग का गठन करने, गठन के बाद अलग सेल बनाने और उसमें अध्यक्ष सहित अन्य पदों पर दिव्यांग (विकलांग) प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने के संबंध में मांग उठायी।
बुधवार को देवभूमि बधिर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मंच के राष्ट्रीय महामंत्री संदीप अरोड़ा ने सीएम को अवगत कराया कि प्रदेश के मूक बधिरजनों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका ताजा उदाहरण देहरादून के नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनियों का शारीरिक शोषण, बलात्कार और भ्रूण हत्या है। इसका प्रमुख कारण प्रदेश में सशक्त विकलांग आयोग का ना होना है। संदीप अरोड़ा ने अवगत कराया कि प्रदेश में नेत्रहीन, विकलांग और मूक बधिरों को एक श्रेणी में रखा गया है जबकि सबकी पीड़ा अलग-अलग है।
राष्ट्रीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मंच के प्रदेश अध्यक्ष अमित डोभाल ने कहा कि मूक बधिरों की शिक्षा, पुनर्वास व सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर कोई नीति सरकार के पास नहीं है। मंच के पौड़ी जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन सजवाण ने कहा कि सरकार प्रदेश में विकलांगजनों के हित में एक ऐसा सशक्त आयोग बनाया जाए जिसमें अध्यक्ष सहित अन्य पदों पर सभी तरह के विकलांगों को शामिल किया जाए। प्रदेश महासचिव अपूर्व नौटियाल और देहरादून जिलाध्यक्ष संजीव कुमार ने भी विचार रखे।
सीएम ने मीडिया सलाहकार राजीव जैन को इस मामले में जल्द ही कार्य करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री से मिलने वालों में अतुल राठौर, राजकुमार, सुनील डांगी शामिल थे।