रुड़की। सिविल अस्पताल में शनिवार को भी शवों को लाने और ले जाने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मृतकों के परिजनों की भारी भीड़ लगी रही। हर कोई अपनों पोस्टमार्टम होने के बाद शव गांव ले जाने का इंतजार करता रहा। लोगों की भीड़ को देखते हुए सिविल अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
शुक्रवार की तरह शनिवार को भी सिविल अस्पताल में बिंडूखड़क, भलस्वागाज, मानकपुर आदमपुर, बाल्लुपुर गांव से शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए सिविल अस्पताल लाने और ले जाने का सिलसिला जारी रहा। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े लोगों के चेहरे पर अपनों को खोने का गम दिख रहा था। हर कोई सरकारी मशीनरी को कोस रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि यदि आबकारी विभाग और पुलिस अवैध और कच्ची शराब पर सख्ती से कार्रवाई करती तो आज यह दिन न देखना पड़ता। दिनभर बीमार व्यक्तियों को सिविल अस्पताल लाने का सिलसिला जारी रहा। शनिवार को 60 सेे अधिक लोगों को सिविल अस्पताल लाया गया। जहां से 65 को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया।
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इनको एम्स ऋषिकेश किया रेफर
राकेश, राजपाल, जसपाल, नेकीराम, तेजपाल, रामनाथ, मामपाल, विनोद, जसविंदर, मोनू, जितेंद्र, बोबी, राजकुमार, गोपी, धर्मेश कुमार, कुशलपाल, राजू, प्रदीप, फूल कुमार, धूम सिंह, बबलू, अशोक, स्वराज, विक्रम, पप्पू, अरविंद, रविकुमार, बबलू, सोनू, राज, अंकित, बबलू, बालेंद्र, सोनू, सुशील, सोनू, नरेश कुमार, श्याम, संजय, पवन सिंह, नसीम, अमरजीत, विकास, अंकित, ऋषिपाल, महावीर, मेहर सिंह, राजकुमार, धनपाल, बाली, जनेश्वर, नभेराम, सुनील, मित्रासैनी, अंकित, नरेश, हरिसिंह, बाबूराम, सोमदत्त, धीेर सिंह, दिलशाद, राजपाल, सुनील, रॉकी आदि।
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रेफर करने के दौरान युवक का हंगामा
शनिवार सुबह झबरेड़ा के एक गांव से एक युवक को नशे की हालत में सिविल अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया था। दोपहर करीब दो बजे अस्पताल प्रशासन की ओर से युवक को एम्स ऋषिकेश रेफर किया जा रहा था तो ट्रामा सेंटर के बाहर युवक हाथ से डिप निकालकर गेट की ओर दौड़ने लगा। युवक के पीछे उसके परिजन भी भागने लगे। बाद में पुलिसकर्मियों ने युवक को पकड़कर एंबुलेंस में बैठाया। तब जाकर युवक शांत हुआ। युवक का कहना था कि अब वह ठीक है और इलाज नहीं कराना चाहता।
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16 लोगों को दी छुट्टी
सिविल अस्पताल में शुक्रवार से इलाज करा रहे 16 लोगों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर शनिवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई। सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि ने बताया बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।