ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
रुड़की और सहारनपुर में जिस तरह कच्ची जहरीली शराब मामले की परत दर परत खुल रही है, उससे यह साबित हो गया है कि अब सिंथेटिक दूध बनाने की तकनीक पर ही तरल पदार्थ से सिंथेटिक शराब बनाने के युग की शुरुआत हो चुकी है। सिंथेटिक दूध की तरह ही तरल पदार्थ को पानी में मिलाकर चंद मिनट में ही सिंथेटिक शराब तैयार की जा रही है। इस धंधे में उतरने वाले आरोपियों को अब न भट्टी बनाने का झंझट है और न ही गुड़ व आग की जरूरत है। इतना ही नहीं सिंथेटिक शराब बनाने को लेकर पुलिस गिरफ्तारी का खतरा भी कम हो गया है।
सहारनपुर और हरिद्वार में कच्ची जहरीली शराब ने इस कदर कहर बरपाया है कि मौत का आंकड़ा सौ से पार हो गया। दोनों जिलों की पुलिस के सामने चुनौती थी कि कच्ची शराब में ऐसा क्या था, जिससे कई जिंदगियों की डोर पलभर में टूट गई। दोनों जिलों की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर एक के बाद एक कड़ी जोड़ी और मंगलवार को आखिर पुलिस को सफलता मिल ही गई। पुलिस ने जिस आरोपी अर्जुन और लाडी को पकड़ा है, उनसे कच्ची शराब बनाने में प्रयोग होने वाले तरल पदार्थ की जानकारी ली तो चौंकाने वाली बात सामने आई। लाडी और अर्जुन ने बताया कि वह तरल पदार्थ में पानी मिलाकर कच्ची शराब तैयार करते थे। तरल पदार्थ में पानी मिलाकर चंद मिनटों में सैकड़ों लीटर कच्ची शराब तैयार होने की बात ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि अब सिंथेटिक दूध की तरह सिंथेटिक शराब बनाने का युग शुरू हो चुका है। सिंथेटिक शराब बनाने और भट्टी पर शराब बनाने में जमीन आसमान का फर्क है। भट्टी पर शराब तैयार करने के लिए गुड़, लाहन, बर्तन समेत अन्य सामान एकत्रित करना पड़ता है। ऐसे में मुखबिरी होने पर गिरफ्तारी होने का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन सिंथेटिक शराब के धंधे में लगे लोगों को इन सब से निजात मिल गई है। इसके अलावा यह सिंथेटिक शराब आसानी से एक जिले से दूसरे जिले भेज दी जाती है। क्योंकि इस सिंथेटिक शराब को पहचानने में पुलिस भी धोखा खा जाती है।