रुड़की। वर्ष 2002 में गिरफ्तार किए गए पाकिस्तान नागरिक आबिद के असली नाम पते और सही नागरिकता के पेंच में पुलिस और खुफिया तंत्र उलझ कर रह गया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आबिद को शांति भंग के आरोप में पुलिस ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया है। अब उसकी नागरिकता के मामले में नए सिरे से जांच की जा रही है। आईबी अधिकारियों ने रुड़की पहुंचकर आबिद से पूछताछ की।
वर्ष 2010 में 25 जनवरी को कुंभ मेले के दौरान खुफिया तंत्र की सूचना पर पुलिस ने आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अजीत सिंह को पाकिस्तानी जासूस होने के आरोप में दबोचा था। उसके पास से मेरठ और रुड़की छावनी के नक्शे बरामद किए गए थे। लाहौर निवासी बताए गए आबिद के पास से पुलिस अधिकारियों ने कई सैन्यों ठिकानों से जुड़ी जानकारियां पाकिस्तान भेजने का आरोप लगाया था लेकिन, 22 जुलाई 2013 को हरिद्वार की अपर जिला जल द्वितीय की अदालत ने उसे बरी कर दिया था। यह मामला अभी भी विचाराधीन है। पिछले दिनों उच्च न्यायालय की ओर से आबिद को बरी किए जाने के मामले में तल्ख टिप्पणी की थी। आबिद बरी होने के बाद से अपने परिवार के साथ रुड़की में रह रहा है। वह खुद को यमुनानगर का रहने वाला बताता है लेकिन, इस बात की पुष्टि करने वाले कोई दस्तावेज उसके पास उपलब्ध नहीं थे। हाईकोर्ट की ओर से की गई सख्ती के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने आबिद को शनिवार को गिरफ्तार कर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था। जहां से उसे शांति भंग करने के आरोप में जेल भेज दिया था। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि आबिद की नागरिकता को लेकर नए सिरे से जांच की जा रही है। इतना तय है कि वह हिंदुस्तान का निवासी नहीं है। अभी वास्तविक नागरिकता को लेकर जांच पड़ताल जारी है। आईबी अधिकारियों ने आबिद से पूछताछ की है।