ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
‘कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए, कहां चराग मयस्सर नहीं गांव के लिए’, कवि दुष्यंत कुमार त्यागी की कविता की ये लाइन झबरेड़ा क्षेत्र के आठ गांवों में जहरीली शराब पीने से हुई वीभत्स घटना पर सटीक बैठती है। किसी के घर का चिराग बुझ गया है तो किसी का सुहाग और किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। घरों में चारों तरफ मातम का अंधेरा छाया हुआ है। रुंधे गले से अपनों को याद कर परिवार के लोगों की चीख सुनकर बच्चे भी सिहर जा रहे हैं। यह घटना मृतकों के परिवारों के अरमान भी जला गई है। अपनों के साथ बीते दिन और आने वाले समय को लेकर जो अरमान परिवारों ने संजोए थे, वह पल पर भी जलकर राख हो गए।
झबरेड़ा क्षेत्र के बिंडुखड़क, बाल्लुपुर, चुड़ियाला, भलस्वागाज, जहाजगढ़, नन्हेड़ा और अनंतपुर गांवों में जहरीली शराब ने मृतकों के परिवारों को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। परिवार के लोग वीभत्स घटना को याद कर सिहर उठते हैं और काल बनकर आए शुक्रवार की सुबह को कोस रहे हैं। वीभत्स घटना से इन परिवारों के अरमान जहरीली शराब की भट्ठियों में जलकर राख हो गए। किसी ने अपने बेटे-बेटी की शादी धूमधाम से करने का अरमान संजोकर रखा था तो किसी ने परिवार के लोगों को आने वाले त्योहारों पर नए कपड़े पहनाने के सपने संजोए थे। हंसी-खुशी खेलते इन परिवारों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि समय का ऐसा चक्र घूमेगा, जो उनके परिवार की खुशी पलभर में लूट लेगा।
इन परिवारों के जेहन में अपनों को खोने का गम है तो अब भविष्य को तलाशने की जद्दोजहद भी। गम की इस घड़ी के बीच इन परिवारों को अपने और बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। पीड़ित परिवार अब बच्चों के भविष्य की नैय्या पार लगाने के लिए सोचने पर मजबूर हैं तो घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। भविष्य क्या रुख होगा और किस पटरी पर जिंदगी दौड़ेगी, परिवार के लोग ये सोचकर ही सिहर उठते हैं। मृतकों के परिवारों के जेहन में बार-बार यही बात आ रही है कि अब उनका और बच्चों का क्या होगा।