रुड़की। अर्द्धकुंभ में आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए जो बम बनाया जा रहा था उसकी भनक किसी को न लगे इसके लिए चारों युवकों ने जौरासी गांव जाने वाली सड़क से लगभग दो किमी दूर जंगल का सुनसान इलाका चुना। सूत्रों की माने तो यहीं पर चारों प्लान बनाते थे।
अर्द्धकुंभ में बम विस्फोट के लिए जो बम बनाया जा रहा था। उसके लिए बारूद की आवश्यकता थी। इसके लिए माचिस की तीलियों से मसाला एकत्रित किया जाना था। लेकिन एक साथ इतनी माचिस लाने और उनकी तीलियों का मसाला निकाले जाने से संदेह हो सकता था। इसलिए इसके लिए इन्होंने जौरासी गांव के जंगल में स्थित एक खंडहर पड़े ट्यूबवेल को चुना। इसके लिए जौरासी ओवर ब्रिज क्रॉस करने के बाद रेलवे ट्रैक के बराबर से रास्ता जाता है। यहां स्थित एक बीएड कालेज तक तो रास्ता ठीक है। लेकिन उससे आगे का मार्ग पैदल और ऊबड़-खाबड़ है। यही वजह है कि इधर कोई दिन में भी आता-जाता नहीं। सूत्रों की मानें तो अखलाक, ओसामा, अजीमुस्सान और मेहराज यहीं बड़ी मात्रा में माचिस लेकर पहुंचते थे और उनका मसाला निकालते थे। उसके बाद मसाले को एक पॉलीथिन में बंद कर मिट्टी खोद कर दबा देते थे। जबकि माचिस की डिब्बियों और तीलियों को शेष हिस्सा जला देते थे। अभी मसाला और एकत्रित किया जाना था। लेकिन उससे पहले आईबी ने चारों का पर्दाफाश कर दिया।
मेहराज के परिजनों ने काटा हंगामा
आईबी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच की टीम दोपहर करीब एक बजे मेहराज और अजीम को लेकर लंढौरा पुलिस चौकी पहुंची। इसके बाद टीम स्थानीय पुलिस के साथ मेहराज के घर पहुंची। मेहराज की निशानदेही पर टीम ने 38 हजार रुपये बरामद किए। इसी दौरान टीम मेहराज को लेकर लौटने लगी तो परिजनों और परिचितों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मेहराज निर्दोष है। उसे फंसाया जा रहा है। मेहराज के भाई सरफराज ने भी कार्रवाई का विरोध किया। कहा कि पुलिस ने उनसे 41 हजार रुपये लिए हैं। इस दौरान मेहराज के परिजनों और परिचितों ने मिलकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की, लेकिन पुलिस टीम मेहराज और अजीम को लेकर वहां से चली गई। इस कार्रवाई को देखकर मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही।
टीम ने बदला रास्ता
जौरासी के जंगल से जिस समय अजीम की निशानदेही पर बारूद की पोटली बरामद कर आईबी लौट रही थी तभी रेलवे ओवर ब्रिज के समीप आईबी ने एकाएक अपनी गाड़ी मुख्य रास्ते से उतारकर कच्चे रास्ते पर ले ली। इसके बाद टीम रेलवे ट्रैक के साथ-साथ नगला इमरती गांव होते हुए रुड़की पहुंची। हालांकि स्थानीय पुलिस मुख्य रास्ते से ही लौटी है। मेहराज का घर रुड़की-लक्सर मुख्य मार्ग पर है। बताया जा रहा है कि मेहराज के घर के बाहर भीड़ होने की वजह से एवं सुरक्षा के लिहाज से टीम ने रास्ता बदला।
मंगलौर में चलाया तलाशी अभियान
मंगलौर (रुड़की)। आतंक की साजिश रचने के आरोप में चार युवकों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने क्षेत्र में कड़ी चौकसी बरतनी शुरू कर दी है।
बृहस्पतिवार रात कोतवाली क्षेत्र के कई होटलों में तलाशी अभियान चलाया। रुड़की रोड स्थित दो होटलों में ठहरे हुए लोगों की भी जांच की गई। सभी के पहचान पत्र देखे गए। इस दौरान होटल प्रबंधन को बिना पहचान पत्र के किसी को भी कमरा नहीं देने की हिदायत दी गई। हाईवे पर पड़ने वाले ढाबों पर भी चेकिंग की गई। खाना खाने के लिए रुकने वाले लोगों की जांच की गई। नारसन व लंढौरा क्षेत्र में भी तलाशी व जांच अभियान चलाया। कोतवाली प्रभारी उत्तम सिंह जिमिवाल ने बताया कि लंढौरा के तेल डिपो की सुरक्षा बढ़ा दी है। नारसन चेक पोस्ट पर वाहनों की जांच का काम मुस्तैदी से कराया जा रहा है। संदिग्ध गतिविधि वाले किसी भी व्यक्ति की सूचना लोगों की ओर से पुलिस को दी जानी चाहिए। तलाशी अभियान में एसएसआई नवीन सेमवाल, नारसन चौकी प्रभारी सुखपाल सिंह, लंढौरा चौकी प्रभारी एमएम भट्ट आदि मौजूद थे।
कई संदिग्धों पर भी नजर
रुड़की। चार युवकों की गिरफ्तारी के बाद कई अन्य संदिग्धों पर खुफिया विभाग की पैनी नजर है। इसके बाद से आईबी की और खुफिया विभाग की पड़ताल चल रही है। सूत्रों के अनुसार जांच में कई अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आ रही है। ऐसे में आईबी की ओर से जल्द कुछ और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ अन्य लोगों की जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
डिपो की बढ़ाई सुरक्षा
रुड़की। लंढौरा में आईओसी, भारत गैस डिपो और हिंदुस्तान पेट्रोलियम डिपो हैं। यहां से प्रदेशभर में डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति की जाती है। चौकी प्रभारी मदन मोहन भट्ट के अनुसार डिपो की संवेदनशीलता को देखते हुए पीएसी तैनात कर दी है। साथ ही लंढौरा कस्बे में भी पुलिस की चौकसी बढ़ा दी है।
घर के संदिग्धों को पहचानना चुनौती
रुड़की। आतंकी आहट सुनाई देने पर सबसे पहले सीमाएं, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों में बाहर से आने वाले संदिग्धों की तलाश की जाती है। लेकिन घर के संदिग्धों को कैसे पहचाना जाए। आतंकी गतिविधियों में चार स्थानीय युवकों की गिरफ्तारी से पुलिस और खुफिया एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है। इससे निपटने के लिए स्थानीय खुफिया एजेंसियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की जरूरत बढ़ गई है।
रुड़की देहात के चार पढ़े लिखे नौजवानों के तार महज सात माह पहले आतंक के सौदागरों से जुड़े। धार्मिक कट्टरता वाली पोस्ट पर लाइक करने से शुरू हुआ बातचीत का दौर इतने खतरनाक मंसूबे तक पहुंचेगा इसका अंदाजा शायद नौजवानों को भी पहले नहीं रहा होगा। बहरहाल गिरफ्तारी से जहां लोगों के मन में तमाम शंकाएं और आशंकाएं जन्म ले रही हैं, वहीं खुफिया एजेंसियों के लिए भी अब होमवर्क की सख्त जरूरत है। आईबी और रॉ समेत सभी सेंट्रल खुफिया एजेंसियां तकनीक के सहारे चारों छात्रों के खतरनाक इरादों को भांपने में कामयाब रही। लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां संसाधनों के लिहाज से इतनी परफेक्ट नहीं है कि वह इतनी बारीकी से संदिग्धों की पहचान कर सकें। ऐसे में सोशल मीडिया पर खतरे की हलचल पर नजर रखने के लिए तकनीक को अपग्रेड करने की अब सख्त जरूरत है।
इनका कहना है
आतंकी संगठनों के आनलाइन जिहाद की योजना को देखते हुए सोशल मीडिया सेल खोला गया है। रुड़की में चार संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद इसे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
-अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, इंटेलिजेंस
इनका कहना है
चार युवकों की गिरफ्तारी के बाद बाहरी लोगों का बारीकी से सत्यापन कराया जा रहा है। बॉर्डर समेत सभी सार्वजनिक स्थलों पर फोकस किया जा रहा है। घनी आबादी में भी संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
-प्रमेंद्र डोबाल, एसपी देहात