रुड़की से हरिद्वार की तरफ पैदल जाते मजदूर।
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लॉकडाउन में मजदूरी न मिलने और अच्छा खाना न मिलने से आहत बंगाल के मजदूर भूखे पेट ही पैदल घर की तरफ निकल पड़े। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी ली। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें दो माह से मजदूरी नहीं दी जा रही है। इसके चलते वे पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े हैं। इसके बाद पुलिस ने आश्वासन दिया कि ठेकेदार से वार्ता की जाएगी और उनके घर जाने की व्यवस्था जल्द ही कराई जाएगी। इसके बाद मजदूर वापस लौट गए।
लॉकडाउन में रुड़की और देहात में बाहरी प्रदेशों के हजारों की संख्या में मजदूर फंसे हैं। पिछले दो माह से मजदूर यहीं रहकर घर जाने का इंतजार कर रहे हैं। वे इस आस में हैं कि सरकार उन्हें घर भेजने की व्यवस्था कराएगी, लेकिन अब मजदूरों के सब्र का बांध टूटने लगा है। रुड़की के एक संस्थान में भी बंगाल के 83 मजदूर एक कंपनी की ओर से ठेकेदार के अंडर में कंट्रक्शन का काम कर रहे थे, लेकिन पिछले दो माह से काम बंद है। आरोप है कि उन्हें ठेकेदार ने मजदूरी भी नहीं दी है। इससे आहत होकर सोमवार को मजदूर भूखे पेट ही पैदल घर जाने के लिए हाईवे पर निकल पड़े। पुलिस ने सभी मजदूरों को सोलानी नदी के पास रोक लिया और जानकारी ली। यहां मजदूरों ने आरोप लगाया कि दो माह से मजदूरी नहीं मिली है और खाना भी अच्छा नहीं दिया जा रहा है। उन्हें सिर्फ घर भिजवाने का आश्वासन दिया जा रहा है। इस पर पुलिस ने आश्वासन दिया कि मामले में ठेकेदार से बात कर मजदूरी दिलाई जाएगी और घर जाने के लिए यहां से ही कोई व्यवस्था कराई जाएगी। वहीं समाजसेवी शोभित गौतम ने उन्हें घर वापसी होने तक भोजन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि इस बाबत कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदार से वार्ता की जा रही है। साथ ही मजदूरों को घर भिजवाने की व्यवस्था के लिए अधिकारियों वार्ता की जा रही है।