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जल संकट का समाधान: आईआईटी रुड़की के अनुसंधान का कमाल, हिमालयी गांव में पानी की उपलब्धता हुई दोगुनी

Mon, 02 Nov 2026 08:13 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की

सार

यह पहल नमामि गंगे, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और जल शक्ति मंत्रालय की वित्तपोषित परियोजना के तहत की गई है।
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आईआईटी रुड़की का जल संकट को लेकर समाधान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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हिमालयी क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान होने वाले जल संकट से निपटने की दिशा में आईआईटी रुड़की ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने टिहरी गढ़वाल जिले के ऊंचौन गांव में वैज्ञानिक तकनीक से नया जलस्रोत विकसित किया है। इससे कम पानी उपलब्ध होने वाले मौसम में पेयजल की उपलब्धता लगभग 500 लीटर से बढ़कर प्रतिदिन 1000 लीटर या उससे अधिक हो गई है। इससे स्थानीय परिवारों को गर्मियों में राहत मिलने की उम्मीद है।

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यह पहल नमामि गंगे, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और जल शक्ति मंत्रालय की वित्तपोषित परियोजना के तहत की गई है। आईआईटी रुड़की के पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रो. अभयानंद सिंह मौर्य इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक हैं। परियोजना का उद्देश्य टिहरी जिले के तकोली गाड जलग्रहण क्षेत्र में सूखते जलस्रोतों का पुनर्जीवन करना है। करीब 143 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में अलकनंदा नदी बेसिन के अंतर्गत दो अनुसंधान अध्ययन किए गए। पहले अध्ययन में जलस्रोतों के पुनर्भरण की प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि जलस्रोतों में पानी पहुंचने का लगभग 82 प्रतिशत योगदान मानसूनी बारिश का है।

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वहीं, सर्दियों की बारिश का योगदान 10 और मानसून से पहले होने वाली बारिश का आठ प्रतिशत है। दूसरा अध्ययन चट्टानों की बनावट, मौसमी बदलाव और मानवीय गतिविधियों के पानी की रासायनिक गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित रहा। दोनों शोध वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। इन अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों ने भूभौतिकीय जांच कर जमीन के भीतर पानी जमा करने वाली चट्टानों की पहचान की। इसके बाद पहाड़ी की ऊपरी ढलान पर खाइयां बनाने की योजना तैयार की गई, ताकि बारिश का पानी तेजी से बहने के बजाय जमीन में रिसकर भूजल का पुनर्भरण कर सके। चिह्नित जलधारण क्षेत्र में नियंत्रित रास्ता बनाकर जमीन के भीतर जमा पानी को सतह तक पहुंचाया गया।

इससे नया जलस्रोत विकसित हुआ। यह जलस्रोत कीर्तिनगर ब्लॉक के ऊंचौन गांव में डाकघर तकोली के अंतर्गत चंद्रबदनी मंदिर की ओर जाने वाली नवनिर्मित सड़क के किनारे विकसित किया गया है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसका उपयोग आम लोगों की समस्याओं के समाधान में हो। प्रो. मौर्य ने कहा कि जलस्रोतों के व्यवहार और भूजल पुनर्भरण की वैज्ञानिक समझ से पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप स्थायी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने जलस्रोत के प्रवाह और गुणवत्ता की निरंतर निगरानी तथा सामुदायिक भागीदारी को भी जरूरी बताया।
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