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सारे सूरमा धराशायी, आज लंकेश की बारी 

Mon, 10 Oct 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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ramlila - फोटो : amarujala
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लंका की रणभूमि में सोमवार को एक-एक कर सभी शूरवीर धराशाही हो गए। श्रीराम और लक्ष्मण के बाणों ने तीनों लोकों में त्राहि त्राहि मचाने वाले यौद्धाओं को मौत के घाट उतार दिया। आज स्वयं लंकेश की बारी है। मंगलवार को विजयदशमी पर श्रीराम के हाथों अहंकारी रावण की मौत होगी। साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जगह-जगह रावण के पुतले का दहन होगा। इस खुशी में शहर से देहात तक जगह-जगह विशाल मेलों का आयोजन किया जाएगा।
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शहर से देहात तक विजयदशमी से एक दिन पहले चरम पर पहुंची श्रीराम लीलाओं के मंचन में लंका में हुए भीषण युद्ध ने दर्शकों को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर किया। इस दौरान मेघनाथ और कुंभकरण जैसे योद्धाओं को श्रीराम और लक्ष्मण ने अपने बाणों से मौत के घाट उतार दिया। मंगलवार को विभिन्न रामलीलाओं के मंचन के दौरान श्रीराम के हाथों लंकेश की मौत होगी। इसके साथ ही शाम को रावण के पुतलों को आग के हवाले किया जाएगा। धू-धूकर जलते रावण के पुतला बुराई पर अच्छाई के रूप में दिखाई देगा। जो इस बात का संकेत है कि अहंकार का नतीजा बुरा होता है।
रुड़की गढ़वाल सभा की ओर से रविवार को श्री राम और रावण के बीच युद्ध हुआ। जिसमें रावण ढेर हो गया। मौके पर सुनील रोथाण ने लक्ष्मण और विजय रावत ने मघनाथ की शानदार भूमिका निभाई। मंचन के दौरान कुशल अभिनय के चलते दर्शक कभी हर्ष से भर उठे तो कभी आंखों में आंसू आ गए। इस अवसर पर धीरेंद्र पोसवाल, राजेंद्र कुलाश्री, राजेश चमोली, प्रदीप बहुखंडी, जगदीश चंद्र तिवारी, अशोक रावत, सुजल, मयंक, पंकज, सुबोध एवं बृजेश पांडे ने विभिन्न पात्रों की भूमि निभाई। इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल, जयप्रकाश कुकरेती, कमलेश्वर पोखरियाल एवं ओमप्रकाश नैथानी आदि मौजूद रहे।
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श्रीराम के हाथों रावण की इहलीला समाप्त 
देवभूमि रामलीला समिति की ओर से न्यू भारत, अशोक नगर एवं भारत कालोनी में श्रीराम लीला मंचन के अंतिम दिन मेघनाथ-लक्ष्मण संवाद, कुंभकरण और रावण का मरण, रावण द्वारा लक्ष्मण के माध्यम से समाज को शिक्षा देना और फिर राम का राज्यभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान मैदान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।श्रीरामलीला का शुभारंभ राज्य आंदोलनकारी चंद्रमा दवी ने फीता काटकर किया। इस दौरान मेघनाथ-लक्ष्मण के संवाद व युद्ध ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। वहीं मेघनाथ का वध, सुलोचना का विलाप कर अपने पति का सिर श्रीराम से मांगने पर दर्शक भाव विभोर हो गए। मंचन के दौरान कुंभकरण युद्ध भूमि में मारा जाता है। रावण इस पर अहिरावण द्वारा श्रीराम-लक्ष्मण को सम्मोहित कर पाताल लोक में भिजवाकर बलि चढ़ाना चाहता है। लेकिन सही समय पर वहां हनुमान पहुंच जाते हैं। जहां उनका सामना अपने पुत्र मकरध्वज से हो जाता है। हनुमान जी उसे बंदी बनाकर अहिरावण का वध कर मकरध्वज को श्रीराम द्वारा पाताल लोक का राजा बनवा देते हैं। अंत में श्रीराम और रावण का युद्ध होता है और रावण युद्ध भूमि में धराशायी हो जाता है। इसके बाय्द श्रीराम के चौदह वर्ष पूरे होने पर अयोध्या पर लौटने पर उनका धूमधाम से राज्यभिषेक किया जाता है। इस मौके पर सतीश नेगी, राजेंद्र सिंह रावत, नरेंद्र गुसाई, प्रदीप सिंह पाल, दिगंगर सिंह, त्रिलोक सिंह, अर्जुन सिंह, बलवंत सिंह, साबर सिंह, आनंद रावत एवं राकेश भट्ट आदि मौजूद रहे।

मेघनाथ की शक्ति से मूर्छित हुए लक्ष्मण
 नगर में चल रही रामलीला में लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन किया गया। मेघनाथ ने लक्ष्मण को हराने के लिए उन पर शक्ति बाण चलाया। लक्ष्मण के मूर्छित होते ही राम की सेना में भगदड़ मच गई। सुषेन वैद्य ने संजीवनी लाने को कहा तो हनुमान संजीवनी लाने चले गए।  मनोज, सोहन लाल ,तरुण शर्मा, प्रदीप शर्मा, सिकंदर, प्रमोद, विनोद गौतम आदि ने अभिनय किया। सुशील शर्मा, मुकेश वर्मा, नरेश, गोपालदास, राहुल, लवी आदि मौजूद रहे। 
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