तीन दिन हुई बारिश के बाद अब देहात क्षेत्र में कोहरे ने परेशान करना शुरू कर दिया है। कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान आलू और टमाटर की फसल को पहुंच सकता है। किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। किसान फफूंदनाशक दवा का छिड़काव कर अपनी फसलें बचा सकते हैं।
करीब तीन दिन से बदले मौसम के मिजाज से जहां लोग परेशान थे, वहीं फसलों के लिहाज से किसान बारिश से खुश थे। वहीं अब दो दिन से मौसम साफ हो गया है। ऐसे में अब कोहरा आना लाजिमी है। वैसे तो अधिकतर फसलों पर कोहरे का ज्यादा असर नहीं पड़ता है लेकिन बारिश के बाद कोहरा पड़ने से आलू और टमाटर की फसल को ज्यादा नुकसान होता है। इस समय जिले में करीब 850 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल खड़ी है। रुड़की क्षेत्र में ही करबी 160 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल खड़ी है। इसके अलावा सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर जिले में टमाटर की फसल खड़ी है। रुड़की उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला ने बताया कि इस समय आलू की फसल लगभग तैयार होने वाली है। इस समय आलू धीरे-धीरे मोटा होने लगता है। ऐसे में यदि कोहरा पड़ेगा तो आलू के खेत में फफूंद आनी शुरू हो जाएगी। ये आलू के ग्रोथ सिस्टम पर असर डालता है और आलू का आकार छोटा हो जाता है। वहीं टमाटर के पेड़ भी कोहरे से बढ़ने बंद हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि आलू की फसल को कोहरे से बचाने के लिए किसान जैविक दवा टाईकोडर्मा या निमोडर्मा का छिड़काव करें। रासायनिक तौर पर डाईयेन एम-45 का छिड़काव कर सकते हैं। ये दोनों दवा फफूंदनाशक होती हैं। फफूंद नहीं होने से आलू पूर्ण रूप से विकसित हो पाएगा।