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Roorkee News: 18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल बरामदगी में आरोपी की जमानत याचिका खारिज

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एनडीपीएस एक्ट के विशेष न्यायाधीश एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रुड़की आशुतोष कुमार मिश्र की अदालत ने 18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल की बरामदगी से जुड़े मामले में आरोपी सचिन मनिहाल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपी के आपराधिक इतिहास और बरामद नशीली दवा की वाणिज्यिक मात्रा को देखते हुए राहत देने से इन्कार किया।
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अभियोजन के अनुसार 11 मई 2026 को एसटीएफ और एएनटीएफ देहरादून की टीम को सूचना मिली थी कि दो युवक मोटरसाइकिल से नशीली दवाओं की खेप लेकर आ रहे हैं। पीठ बाजार लंढौरा-शिकारपुर पुलिया के पास घेराबंदी की गई लेकिन दोनों युवक मोटरसाइकिल और एक गत्ते का डिब्बा छोड़कर फरार हो गए।
डिब्बे की जांच में 18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद हुए। जांच के दौरान कोरियर सेवा के एलआर नंबर के आधार पर खेप की पड़ताल की गई। पुलिस के मुताबिक यह खेप गोरखपुर से मुजफ्फरनगर भेजी गई थी। विवेचना में सामने आया कि उक्त कैप्सूल मुजफ्फरनगर निवासी सचिन मनिहाल की ओर से रुड़की के सह-अभियुक्त को विकास ट्रांसपोर्ट के माध्यम से भेजे गए थे।
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आरोपी की ओर से अदालत में कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है और वह प्राथमिकी में नामजद भी नहीं था। वहीं अभियोजन ने तर्क दिया कि आरोपी नशीली दवाओं की सप्लाई शृंखला से जुड़ा है और उसे जमानत मिलने पर दोबारा अपराध करने की आशंका है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ थाना पथरी, हरिद्वार में एनडीपीएस एक्ट के तहत एक अन्य प्राथमिकी भी दर्ज है जो अभी लंबित है। अदालत ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मानने का पर्याप्त आधार नहीं है कि आरोपी निर्दोष है या जमानत पर छूटने के बाद अपराध नहीं करेगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सचिन मनिहाल की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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