बच्चे का हाथ बाहर आते ही थम गईं थी सांसें, डॉक्टरों की सूझबूझ से सुरक्षित हुआ प्रसव
रुड़की। सिविल अस्पताल में बृहस्पतिवार देर रात एक गर्भवती के प्रसव के दौरान ऐसी जटिल स्थिति उत्पन्न हो गई कि परिजनों के साथ अस्पताल स्टाफ की भी सांसें थम गईं थी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ़ शैली और बाल रोग विशेषज्ञ एवं सीएमएस डॉ़ एके मिश्रा की सूझबूझ से मां और नवजात दोनों की जान बचा कर एक नई जिंदगी मिली है।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, नारसन क्षेत्र के मीरपुर गांव निवासी एक गर्भवती को प्रसव होने पर देर रात सिविल अस्पताल में लाया गया। महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। पहले बच्चे का सामान्य प्रसव सुरक्षित रूप से करा लिया गया लेकिन दूसरे बच्चे के प्रसव के दौरान अचानक स्थिति गंभीर हो गई। बच्चे का एक हाथ बाहर आ गयाजबकि शरीर का बाकी हिस्सा गर्भ में ही फंसा रह गया। काफी प्रयास के बाद भी बच्चा बाहर नहीं आ सका। महिला का बीपी 180 और हीमोग्लोबिन 8 पहुंच गया था। इससे जच्चा और बच्चे दोनों की जान को खतरा पैदा हो गया था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। अस्पताल में उस समय एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध न होने के कारण बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सक को बुलाया गया। इसके बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शैली, बाल रोग विशेषज्ञ व सीएमएस डॉ. एके मिश्रा की निगरानी में सफल ऑपरेशन कर मां और नवजात को सुरक्षित बचा लिया गया। दोनों डाक्टरों की तत्परता ने मां और बच्चा को एक जिंदगी देकर अपने कार्य के प्रति मानवता का भी संदेश दिया।