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विद्यालयों के कोटिकरण को लेकर शिक्षक और विभाग में रार

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रुड़की। स्थानांतरण नियमावली को लेकर कराए जा रहे विद्यालयों के कोटिकरण के मामले में शिक्षक और विभाग में रार शुरू हो गई है। शासन के आदेश पर जहां विभाग विद्यालयों को सुगम और दुर्गम के चिह्निकरण में जुटा है, वहीं शिक्षक संगठनों का दावा है कि विभाग जिले के सभी स्कूलों को सुगम घोषित करने जा रहा हैं। जो न्याय संगत है। शिक्षक संगठनों ने विभाग की कार्रवाई का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी हैं।
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शासन के आदेश पर विभाग स्थानांतरण नियमावली लागू करने के लिए विद्यालयों का कोटिकरण करा रहा हैं। इसमें विद्यालयों को परिस्थितियों के आधार पर सुगम और दुर्गम की श्रेणी में रखा जाता हैं। शिक्षक संगठनों का दावा है कि प्रत्येक जिले के स्कूलों को 60 और 40 के अनुपात में रखा जाता है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने जिला शिक्षाधिकारी प्रारंभिक शिक्षा को ज्ञापन देकर बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि विभाग पूरे जिले के स्कूलों को सुगम को घोषित करने जा रहा हैं। इसके चलते शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी। क्योंकि नवनियुक्ति शिक्षकों को नियमानुसार दुर्गम में तैनाती दी जाती हैं। इसके चलते शिक्षकों को हरिद्वार जिले में तैनाती नहीं मिलेगी। यदि स्थिति प्रमोशन पाने वाले शिक्षकों के साथ भी होगी। इससे शिक्षकों की कमी झेलना रहा हरिद्वार में व्यवस्था ओर बिगड़ जाएगी। शिक्षक संगठन के लोगों ने मांग की है कि कोटिकरण स्कूलों की परिस्थितियों के आधार पर घोषित किया जाए। एक जगह बैठकर सभी स्कूलों को सुगम घोषित नहीं किया जना चाहिए। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोटिकरण को लेकर उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया, तो आंदोलन से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रहमपाल सैनी ने बताया कि कोटिकरण का कार्य चल रहा है। परिस्थितियों के आधार पर ही विद्यालयों का कोटिकरण किया जाएगा।
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