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सरसों के लिए खतरा है यह मौसम, बरतें सावधानी

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लक्सर। इस मौसम में घना कोहरा पड़ना शुरू हो जाता है। कृषि विभाग इस मौसम को सरसों के लिए खतरा मान रहा है। उनका कहना है कि दिन भर धूप नहीं निकली तो सरसों में चेंपा रोग लगा सकता है। जिससे जनपद के सरसों उत्पादक किसानों को नुकसान होने की आशंका है।
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काफी किसानों ने इस बार आलू की जगह सरसों की खेती करने का निर्णय लिया था। इससे सरसों के बुवाई क्षेत्रफल में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई थी, लेकिन अब आसमान में छाए बादलों ने सरसों के किसानों को चिंतित कर दिया है। दिसंबर माह में घना कोहरा पड़ने लगा है जो सरसों के लिए खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि आमतौर से दिसंबर के अंतिम सप्ताह अथवा जनवरी के पहले सप्ताह में ही लगभग 10 से 15 दिनों के लिए कोहरा पड़ता है। इस बार अभी से कोहरा पड़ने लगा है। इससे सरसों में चेंपा रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। इससे सरसों पर फली नहीं बनेगी। इससे सरसों में काफी नुकसान हो जाएगा।
चेंपा रोग का कीड़ा हल्के हरे और पीले रंग का होता है। यह प्रौढ़ एवं शिशु पत्तियों की निचली सतह और फूलों की टहनियों पर समूह में पाए जाते हैं। यह कीड़े प्रौढ़ व शिशु पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। लगातार नुकसान करने पर पौधों के विभिन्न भाग चिपचिपे हो जाते हैं जिन पर काला कवक लग जाता है। परिणामस्वरूप पौधों की भोजन बनाने की ताकत कम हो जाती है। जिससे पैदावार में कमी हो जाती है। कीट ग्रस्त पौधे की वृद्धि रुक जाती है कभी-कभी तो फलियां भी नहीं लगती और यदि लगती हैं तो उनमें दाने छोटे रह जाते हैं।
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