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तीन अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में 60 करोड़ की पेयजल योजनाओं को झटका

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नगर निकायों से अछूते अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल योजनाओं को बड़ा झटका लगा है। करीब डेढ़ साल पहले चार क्षेत्रों में शुरू की गई 80 करोड़ की योजनाओं में से तीन जगहों पर ओवरहैड टैंक का निर्माण शुरू होने पर जमीन विवाद आड़े आ गए। इसके चलते योजनाएं अधर में लटक गई हैं। विवाद का हल नहीं होने पर अब विभाग ओवरहेड टैंकों के निर्माण के लिए जमीन खरीदने को विवश है। ऐसे में गर्मियां शुरू होने के बाद भी करीब 40 हजार की आबादी को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की राह बाधित हो गई है।
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उत्तराखंड पेयजल निगम हरिद्वार की ओर से जिले के आठ अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में आगामी 30 वर्षों के लिए पेयजल, सीवरेज एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए तैयार मास्टर प्लान की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत पहले 220 करोड़ की लागत से पेजयल टैंक और पाइप लाइन आदि बिछाने के लिए योजनाएं स्वीकृत हुई थीं। करीब डेढ़ साल पहले योजना के पहले चरण में करीब 80 करोड़ की योजनाएं शुरू की गई थीं। इसके तहत चार क्षेत्रों मोहनपुरा, नगला, भंगेड़ी और सैदपुरा में 20-20 करोड़ रुपये ओवरहेड टैंक के साथ ही पाइप लाइन बिछाई जानी थी लेकिन भंगेड़ी को छोड़कर अन्य तीन जगहों पर योजना शुरू होने के साथ ही जमीन विवाद सामने आ गए।
विभाग ने काम शुरू किया तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते काम रोक दिया गया। खास बात यह थी कि इस योजना में उच्च गुणवत्ता के ओवरहेड टैंक और पाइप लाइनें बिछाई जानी थी ताकि ग्रामीणों को कई मंजिल ऊंचे भवनों तक पूरे प्रेशर के साथ पानी उपलब्ध हो। यही नहीं, ओवरहेड टैंक में काफी गहराई के बोरिंग से शुद्ध जल उपलब्ध कराना था लेकिन जमीन विवाद ने राह में रोड़ा अटका दिया। अब निगम तीनों जगहों पर अपनी जमीन खरीदने का तैयारी कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जमीन उपलब्ध होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। संवाद
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मोहनपुरा में अटकी योजना के लिए निगम से मांगी भूमि
मोहनपुरा में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करीब एक साल पहले टैंक के निर्माण का काम शुरू हो गया था लेकिन यूपी सिंचाई विभाग के अधीन भूमि होने के कारण काम रोक दिया गया। यूपी सिंचाई विभाग ने भूमि के लिए एनओसी जारी करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते काम अधर में लटक गया। इसके अलावा सैदपुरा और नगला में भी ग्रामीणों की ओर से जमीन पर आपत्ति जता दी गई।
आठ क्षेत्रों में 30 वर्ष के बना गया है 570 करोड़ का मास्टर प्लान
जिले के आठ अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में आगामी 30 वर्षों के लिए पेयजल, सीवरेज एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान किया गया है। उत्तराखंड पेयजल निगम हरिद्वार की वर्ल्ड बैंक परियोजना इकाई की ओर से इसके लिए सर्वे कराया गया है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए करीब 570 करोड़ का खर्च आंका गया है। करीब डेढ़ साल पहले एक सर्वेयर कंपनी ने बहादराबाद, जगजीतपुर, रावली महदूद, मोहनपुरा, नगला इमरती, ढंडेरा, भंगेड़ी महावतपुर और सैदाबाद गांवों में सर्वे किया था। आने वाले तीस वर्षों तक इन गांवों में अनुमानित जनसंख्या के हिसाब से पेयजल की जरूरत, ओवरहेड टैंक और पेयजल लाइनों की जरूरत, सीवरेज व कूड़ा प्रबंधन के लिए संसाधनों का आकलन किया गया है। माना जा रहा है कि शासन की ओर से इस मास्टर प्लान पर जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।
चार जगहों पर ओवरहेड टैंक के निर्माण का काम शुरू कर दिया गया था लेकिन मोहनपुरा, सैदपुरा और नगला में जमीन विवाद के चलते काम रोकना पड़ा है। अब विभाग जमीन खरीदने की तैयारी कर रहा है। जमीन की प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
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-एमके करारा, अधिशासी अभियंता, उत्तराखंड पेयजल निगम, हरिद्वार वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट यूनिट
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