ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
सिखों के पहले गुरुनानक देव की जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मनाई गई। प्रकाश पर्व मन की बुराइयों को दूर कर उसे सत्य, ईमानदारी और सेवाभाव से प्रकाशति करना है। रामनगर गुरुद्वारा श्रीकलगीधर से विशाल नगर कीर्तन निकाला गया। पंज प्यारे नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे थे।
श्रीगुरुग्रंथ साहिब को फूलों की पालकी से सजे वाहन पर सुशोभित करके कीर्तन विभिन्न जगहों से होते हुए गुरुद्वारे पहुंची। प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में संगत ने भाग लिया। कीर्तनी जत्थे कीर्तन कर संगत को निहाल रहे थे। गुरुद्वारा के सेवादारों ने संगत को गुरुनानक देव के बताए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। गुरुनानक देव ने अपना जीवन समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में समर्पित कर दिया था। संगत को बताया गया कि एक ही गुरु हैं और कोई नहीं। प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। यह पर्व समाज के हर व्यक्ति को साथ में रहने, खाने और मेहनत से कमाई करने का संदेश देता है। नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री कलगीधर रामनगर से शुरू होकर राम नगर चौक, मकतूलपुरी, अंबर तालाब अनाज मंडी, मेन बाजार से सिविल लाइंस होते हुए शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुए गुरुद्वारा श्रीसत्संग सभा सिविल लाइंस पहुंचा। इसके बाद बीटी गंज गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा पर नगर कीर्तन संपन्न हुआ। इस अवसर पर सरदार देवेंद्र सिंह चंडोक, हरमीत सिंह दुआ, इंदरबधान, बलबीर सिंह चंडोक,अवतार सिंह चौधरी, अजीत सिंह सेठी, सिमरजोत सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह छिब्बर, तरणप्रीत सिंह आदि रहे।