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प्रदेश सरकार का सस्ता कर्ज पड़ न जाए भारी

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रुड़की। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना का सस्ता कर्ज किसानों पर भारी भी पड़ सकता हैं। किस्त टूटने पर किसानों को पूरे साढ़े सात प्रतिशत ब्याज देना होगा। जबकि समय पर किस्तें देने वाले किसानों को दो प्रतिशत ब्याज देना होगा।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तीन दिसंबर को रुड़की में कृषि मेले के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना की शुरूआत की थी। इसमें किसानों को दो प्रतिशत ब्याज दर पर एक लाख तक का सस्ता कर्ज दिया जाना है। इसके लिए जिले को 100 करोड़ का बजट मिला है। योजना को अल्पकालीन और मध्यकालीन दो भागों में बांटा गया हैं। अल्पकालीन में वे किसान आते हैं जो इस पैसे से गाय, भैंस और अन्य व्यवसाय करना चाहेंगे। मध्यकालीन में वे किसान आएंगे जो इस पैसे को खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग में लाएंगे। अल्पकालीन ऋण लेने वाले किसानों को व्यवसाय चलने पर प्रतिमाह किस्त देनी होगी। मध्यकालीन किसानों को 180 दिन में किस्त देनी होगी। यदि ये किसान अपनी-अपनी समय अवधि में किस्त नहीं देते तो इन किसानों को पूरा साढ़े सात प्रतिशत का ब्याज देना होगा। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वह सोच समझकर योजना का लाभ लें क्योंकि, किस्त टूटी तो सरकार का सस्ता ऋण महंगा पड़ सकता है। जिला सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा ने बताया कि समय से ऋण जमा न कराने वाले किसानों को साढ़े सात प्रतिशत का ब्याज देना होगा।
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