रुड़की। लिब्बरहेड़ी शुगर मिल की गेट की पर्चियां भी अब समिति कर्मचारी बांटेंगे। समिति में कर्मियों की कमी के चलते मिल कर्मचारी इस पेराई सत्र से पर्चियां बांट रहे थे लेकिन, वितरण में हेराफेरी होने पर किसानों की मांग पर समिति ने सोमवार को यह निर्णय लिया।
वैसे तो किसानों को गेट पर्चियां बांटने का काम गन्ना समितियों का होता है लेकिन, लिब्बरहेड़ी गन्ना समिति में कर्मचारियों की कमी के चलते आपसी सहमति से फैसला लिया था कि तौल केंद्रों की पर्चियों का वितरण समिति द्वारा किया जाएगा। गेट की पर्चियों का वितरण शुगर मिल द्वारा किया जा रहा था लेकिन, कुछ किसानों ने मिल कर्मचारियों द्वारा पर्चियों के वितरण पर आपत्ति जताई। किसानों का आरोप है कि मिल द्वारा बांटी जा रही पर्चियों का वितरण सही नहीं हो रहा है। इससे किसान बेहद परेशान हैं। किसानों ने इससे अधिकारियों को अवगत कराया। लिब्बरहेड़ी समिति के सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि किसानों की मांग पर मिल गेट की पर्चियों के लिए समिति के कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। अब इनके कर्मचारी मिल गेट की पर्चियों का वितरण करेंगे।
सप्लाई इंचार्ज का तबादला
समिति से जुड़े किसानों का आरोप है कि पर्चियों के वितरण में सप्लाई इंचार्ज जाकिर अनियमितता बरत रहे हैं। सप्लाई इंचार्ज अपने चहेतों को ही पर्चियां जारी कर रहे हैं। समिति सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि आरोप के बाद जाकिर को हटा दिया है। उसके बाद सप्लाई इंचार्ज की जिम्मेदारी बाबू सुरेश चौहान को दी गई है।
किसानों ने किया इकबालपुर मिल से किनारा
रुड़की। पिछले पेराई सत्र का अब तक भुगतान न होने और इस सत्र का भुगतान भी समय से न होने पर गन्ना किसानों ने इकबालपुर शुगर मिल से किनारा करना शुरू कर दिया है। शुरूआत में जहां 52 हजार क्विंटल प्रतिदिन गन्ने की पेराई हो रही थी वह अब घटकर 35 हजार क्विंटल पर सिमट कर रह गई है।
इकबालपुर शुगर मिल पर विगत पेराई सत्र का भी किसानों का अभी तक करीब बीस करोड़ रुपये बकाया है। इस पर यह माना जा रहा था कि इस पेराई सत्र में किसान इस मिल से किनारा करेंगे लेकिन, पेराई सत्र की शुरुआत में ही यह दावा उल्टा साबित हुआ। किसानों ने इकबालपुर मिल पर विश्वास जताया और इसे गन्ना देने में कंजूसी नहीं की। शुरू-शुरू में एक दिन में गन्ने की पेराई करीब 52-53 हजार क्विंटल तक हुई लेकिन अब किसानों ने इस मिल से किनारा करना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि अब प्रतिदिन करीब 35 हजार क्विंटल तक ही पेराई हो रही है। अधिकारियों की मानें तो इसके पीछे एक बड़ा कारण भुगतान है। किसान यह मानकर चल रहे हैं कि मिल इस पेराई सत्र का भुगतान रोक लेगी। जिसके चलते वह मिल को गन्ना देने से बच रहे हैं। किसान कोल्हूओं की ओर रुख कर रहे हैं। इकबालपुर समिति के सचिव जय सिंह ने बताया कि मिल में गन्ने की आवक घट गई हैं। अब प्रतिदिन आवक 35 हजार क्विंटल रह गई है।