अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। रक्षाबंधन पर रोडवेज में वाहनों का टोटा रहा। चालकों और परिचालकों के अवकाश से 30 में से 12 बसों का संचालन नहीं हो सका। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर रक्षाबंधन के लिए उत्तराखंड के बाद इस बार यूपी की बसों में भी पहली बार बहनों के लिए निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में बहनों ने इसका लाभ उठाया। दूसरी ओर रेलवे में भी और दिनों की अपेक्षा ट्रेनों में अधिक भीड़ रही।
रक्षाबंधन पर उत्तराखंड सरकार की ओर से कई सालों से बहनों के लिए निशुल्क यात्रा का प्रावधान किया गया है। वहीं पहली बार यूपी की बसों में भी निशुल्क यात्रा का प्रावधान किया गया। दरअसल उत्तराखंड में राज्य की सीमा के भीतर ही निशुल्क यात्रा की सुविधा थी। ऐसे में रुड़की से लगी यूपी की सीमा में घुसते ही बहनों को बसों का किराया देना पड़ता था। दिल्ली जाने वाली बहनों को नारसन के बाद पूरा किराया वहन करना पड़ता था, जबकि सहारनपुर और मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाली बहनों को भी इसका लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन इसबार यूपी की बसों में निशुल्क यात्रा से महिलाओं में अधिक उत्साह रहा। सहारनपुर, छुटमलपुर, मुजफ्फरनगर और यूपी के तमाम स्थानों पर जाने के लिए बहनों ने यूपी की रोडवेज बसों का सहारा लिया, जबकि देहरादून और हरिद्वार सहित उत्तराखंड की सीमाओं में जानी वाली बहनों ने उत्तराखंड डिपो की बसों को तवज्जो दी। हजारों की संख्या में बहनों ने रक्षाबंधन पर निशुल्क यात्रा का लाभ उठाया। डिपो के सहायक महाप्रबंधक जेके शर्मा का कहना है कि रुड़की डिपो में परिचालकों और चालकों के अवकाश से 30 में से 12 बसों का संचालन नहीं हो सका। इसके बावजूद यात्रियों के लिए यथा संभव बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई।