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आयुर्वेद को बढ़ावा देने की घोषणाएं साबित हो रही हवाई

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मंगलौर। जमीन न मिलने से नगर का राजकीय आयुर्वेद अस्पताल किराए के गिरासू भवन में संचालित किया जा रहा है। जिसकी वजह से स्टाफ व मरीज परेशान हैं।
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देवभूमि उत्तराखंड में आयुर्वेद को बढ़ावा देने की घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन इन पर अमल नहीं होता। इसकी एक बानगी नगर का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। अस्पताल किराए के भवन में लंबे समय से संचालित किया जा रहाहै। भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। मुख्य भवन के कमरों में दरार आ गई हैं। अस्पताल में रोज 50-60 रोगी उपचार करने आते हैं। अस्पताल में दो चिकित्सकों के अलावा दस अन्य कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पंच कर्म चिकित्सा की सुविधा भी यहां उपलब्ध है, लेकिन दवाइयों का बजट कम है। सालभर से जिले से साल में करीब 22 हजार रुपये की दवाई मिल पा रही हैं। अलबत्ता कुछ दवा केंद्र से मिलने पर राहत जरूर मिली है। अस्पताल प्रभारी डॉक्टर अंजू का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी तरफ से रोगियों को अच्छी चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। भवन बनने से क्षेत्रवासी लाभाविंत होंगे। जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी डॉक्टर विनय शर्मा का कहना है कि अस्पताल का भवन बेहद खराब हालत में है। अगर दो बीघा भूमि उपलब्ध करा दी जाए तो वह जिला योजना से भवन बनवाने का प्रयास करेंगे।
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इनकी सुनिए
- वरिष्ठ नागरिक डॉक्टर राज कुमार का कहना है कि कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल की हालत मे सुधार किया जाना चाहिए। अस्पताल का भवन बनने से स्टाफ को तो रहने की जगह मिलेगी ही। रोगियों को भर्ती होकर इलाज कराने में मदद होगी।
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