रुड़की। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देकर देश का प्रमुख राज्य बनाने का दावा हर सरकार करती रही है लेकिन बिना सड़कों को दुरुस्त किए ये दावे पूरे नहीं हो सकते। राज्य के प्रवेश द्वारा नारसन, मंगलौर और रुड़की में ही सड़कों का बुरा हाल है अन्य सड़कों की तो बात ही क्या करें राज्य को पूरे देश से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग सात सालों से लगातार चौड़ीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है। इस दौरान तीन सरकारें बदल गई पर हालात नहीं बदले। कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां राज्य बनने के बाद सड़कों का कायाकल्प हुआ ही नहीं । लक्सर, खानपुर और झबरेड़ा में तो अधिकतर गांवों की सड़कें टूटी हुई हैं वहीं घाड़ क्षेत्र में सड़कों का अभाव पूरी तरह विकास का मार्ग रोके हुए हैं। क्षेत्र के करीब 250 गांवों के संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हैं।
नारसन से राज्य की सीमा शुरू होती है। इस प्रवेश द्वार पर ही कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग का काम अधूरा पड़ा हुआ है। कहीं मेन सड़क में गड्ढे हैं तो कहीं अभी तक सर्विस लेन का काम ही पूरा नहीं हो सका है। बार-बार अधिकारी अधूरे हाईवे को पूरा कराने का दावा करते हुए निरीक्षण करते हैं लेकिन कभी खनन सामग्री नहीं मिलने के कारण तो कभी अधिकारियों की दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव के कारण काम अधूरा हीं पड़ा है। मंडावली, गुरुकुल नारसन और मंगलौर के पास आधा अधूरा हाईवे नौ सालों से चल रहे इस काम की गति की गवाही दे रहा है। करीब सौ से ज्यादा गांवों को जोड़ने वाले आसपास के संपर्क मार्ग भी यहां सड़कों के कायाकल्प का इंतजार कर रहे हैं। झबरेड़ा और मंगलौर क्षेत्र में भी कई सड़कों की हालत खराब है।