ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
स्कूली बच्चों का खाता खोलने में आनाकानी करने वाले बैंकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने उप शिक्षाधिकारियों को ऐसे बैंकों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जो स्कूली बच्चों का खाता खोलने में हीलाहवाली करते हैं। इसके बाद सूची को कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा।
बीते वर्ष शिक्षा विभाग ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना लागू की थी। इसके तहत, स्कूली बच्चों के बैंक खातों में ड्रेस और किताबों का पैसा भेजा जाना था। इसके लिए छात्र-छात्राओं के बैंक खाते खोले जाने थे, लेकिन अब भी कुछ ऐसे बच्चे हैं, जिनके खाते बैंकों में नहीं खुल पाए हैं। इसके चलते विभाग को डीबीटी योजना में राहत देनी पड़ी थी। इसके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र के स्कूली बच्चों का पैसा सीधे स्कूलों के प्रधानाचार्यों के खातों में भेजा गया था जबकि शहरी क्षेत्र के बच्चों का पैसा उनके खातों में डाला गया।
वहीं, बच्चों का खाता नहीं खुल पाने के पीछे बैंकों की हीलाहवाली भी सामने आ रही है। बैंकों का मानना है कि इन खातों में एक बार पैसा आकर फिर पूरे साल खाली रहेंगे। लिहाजा ये खाते अनावश्यक हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने जिले के सभी उप शिक्षाधिकारियों को निर्देश जारी कर ऐसे बैंकों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है, जो खाते खोलने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके बाद सूची को जिलाधिकारी दीपक रावत के पास कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।