अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की।
अपने बच्चे की मौत का गम भूलाकर ग्राम प्रधान गांव के अन्य बच्चों की जान बचाने में जुटा है। उसने पहले गांव में फैली बीमारी की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी। उसके बाद से वह बुखार की चपेट में आए बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंच रहा है।
टोडा एहतमालपुर गांव में दो सप्ताह से संदिग्ध बुखार फैला हुआ है। यह बुखार अब तक पांच मासूमों की जान ले चुका है। इसके अलावा करीब दो दर्जन बच्चे बीमार हैं। बुखार से जिन पांच बच्चों की जान गई है। उनमें ग्राम प्रधान अब्दुल वाजिद का सात वर्षीय बेटा हम्माज भी है। हम्माज को भी इसी तरह से बुखार आया था। उसे उपचार के लिए जौलीग्रांट ले जाया गया। जहां 10 अगस्त को उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई, लेकिन बेटे की मौत होने का गम अब्दुल वाजिद ने गांव के अन्य बच्चों के लिए भूला दिया। गम में ही उसने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। उसके बाद शनिवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। टीम ने बीमार बच्चों की जांच की और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया। अब्दुल वाजिद खुद बच्चों को भर्ती कराने अस्पताल पहुंचा। रविवार को भी वह गांव के चार-पांच बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचा। ग्राम प्रधान अब्दुल वाजिद ने बताया कि उसके साथ जो हुआ वह अब ऐसा दूसरों के साथ नहीं होने देगा। जो बच्चे बीमार हैं उनके उपचार के लिए वह हर संभव मदद करेगा। रविवार को उसने सीएमओ रविंद्र थपलियाल को फोन कर गांव में बीमार बच्चों की स्थिति से अवगत कराया।