ब्यूरो/अमर उजाला, पिरान कलियर
साबिर पाक के 750वें सालाना उर्स के दौरान रविवार को चारों धुनों के सूफी संतों और बाबाओं ने दरगाह कार्यालय पर पिछले नौ माह से धुनों पर लंगर नहीं मिलने को लेकर दरगाह प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। तहसीलदार ने पुरानी व्यवस्था शुरू करने का आश्वासन दिया। इसके बाद बाबाओं ने धरना खत्म किया।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने दरगाह साबिर पाक के लंगर की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये इसमें बदलाव किया था। पहले लंगर जायरीन लाइन में लग कर लेते थे और कुछ लंगर धुनों और आसपास के गांव की विधवा महिलाओं को वितरित किया जाता था। लेकिन, करीब नौ माह पहले जेएम ने इस व्यवस्था में बदलाव कर साबिर पाक के लंगर को कलियर में आने वाले जायरीनों और अन्य सभी को बैठाकर खाने की व्यवस्था कराई थी। लेकिन लंगर नौ माह से चारों धुनों पर नहीं बांटा जा रहा है, जिसका विरोध करते हुए चारों धुनों के सदर सूफी संत बाबाओं और फकीरों ने दरगाह कार्यालय पहुंचकर दरगाह प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। और लंगर की वर्षों पुरानी परंपरा को बहाल करने की मांग की। दरगाह दफ्तर पर बाबाओं ने ताला जड़ दिया। प्रदर्शन की सूचना पाकर तहसीलदार मनजीत सिंह गिल दरगाह प्रबन्धक शाहिद अली और मेला कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार नैनवाल के साथ चारों धुनों के सदर और बाबाओं, फकीरों की बैठक हुई, जिसमें सहमति बनने के बाद ही विरोध समाप्त किया गया।
तहसीलदार मनजीत सिंह गिल का कहना है कि चारों धुनों पर जो लंगर की व्यवस्था पूर्व से चली आ रही थी, उसे बहाल कर दिया गया है। अब चारो धुनों पर लंगर पहले की तरह ही दिया जाएगा।