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अब गंगा में नहीं जाएगी 190 होटलों की गंदगी

Tue, 21 Jun 2016 12:28 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
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रुड़की। हरिद्वार जिले के 500 होटलों में से करीब 190 होटलों की गंदगी अब सीधे गंगा में प्रवाहित नहीं होगी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती के चलते इन होटलों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन करवाने को जल संस्थान में सीवर कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया है। कनेक्शन के बाद इन होटलों की गंदगी जल संस्थान के शुद्धिकरण संयंत्र में जाएगी। जहां से इसे ट्रीटमेंट के बाद बाहर छोड़ा जाएगा।
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गौरतलब है कि एनजीटी की ओर से गंगा में प्रवाहित हो रही होटलों एवं धर्मशालाओं की गंदगी पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। इस सख्ती के चलते करीब एक माह पूर्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हरिद्वार के चार होटलों की बंदी के आदेश जारी किए थे। इससे पहले भी हरिद्वार के एक नामी होटल को सील कर दिया था। इस सख्ती का असर यह देखने को मिला कि पिछले दो-तीन माह में जिले के 190 होटलों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। खास बात यह है कि आवेदन करने से पहले किसी भी होटल को नियमानुसार जल संस्थान से सीवर कनेक्शन लेना होता है। आवेदन के साथ यह भी सुनिश्चित हो गया है कि संबंधित होटलों की गंदगी गंगा में न जाकर मायापुर स्थित शुद्धिकरण संयंत्र में जाएगी।

पेनल्टी में दी छूट का भी असर
इतनी बड़ी संख्या में होटलों के आवेदन के पीछे पेनल्टी में छूट की स्कीम ने भी भूमिका निभाई है। प्रदूषण बोर्ड मुख्यालय की ओर से दिसंबर- 2015 से मार्च 2016 तक के बीच रजिस्ट्रेशन करवाने वाले कई सालों से स्थापित होटलों को छूट दी थी कि उन पर अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराए जाने को लेकर कोई पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी। उसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय के अनुरोध पर इस छूट की सीमा को मार्च से बढ़ाकर 31 मई कर दी थी। इस अवधि में 190 होटल प्रबंधकों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया।
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इनका कहना है
पिछले तीन-चार महीनों में 190 होटलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। साथ ही इन्होंने सीवर कनेक्शन भी ले लिया है। अब इनकी गंदगी हरिद्वार स्थित शुद्धिकरण संयंत्र में पहुंचेगी। फिलहाल संयंत्र की क्षमता पर्याप्त है। फिर भी भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए काम चल रहा है।
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डा. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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