रुड़की। आरटीई के तहत दाखिले के प्रति प्राइवेट स्कूल जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पोर्टल पर पंजीकरण के प्रति आलम यह है कि ग्यारह दिन में जिले भर के 800 स्कूलों में से 60 स्कूलों ने ही पंजीकरण कराया है, जबकि मात्र चार दिन ही पंजीकरण के लिए बचे है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पंद्रह अप्रैल तक पंजीकरण नहीं कराने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी।
प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होती है। इसका पूरा भुगतान सरकार की ओर से किया जाता है, लेकिन अक्सर शिकायतें मिलती रहती थी कि प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत एडमिशन करने में आनाकानी करते है। प्राइवेट स्कूलों का दावा है कि भुगतान में बहुत देर होता है। जिससे स्कूल प्रशासन को परेशानी होती है। जिससे प्राइवेट स्कूल अक्सर आरटीई के तहत एडमिशन करने से बचते है और अभिभावकों को टालते रहते है। विभाग ने इस समस्या को देखते हुए इस वर्ष एडमिशन ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए एक अप्रैल से पंद्रह अप्रैल तक प्राइवेट स्कूलों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना है। जिसके बाद 16 अप्रैल से अभिभावक अपने बच्चों का ऑनलाइन एडमिशन करा सकते है। प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन पंजीकरण कराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे है। आलम यह है कि अब तक 800 में से 60 स्कूलों ने ही पंजीकरण कराया है। इससे आरटीई को लेकर प्राइवेट स्कूलों की मानसिकता सामने आ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि जो भी स्कूल निर्धारित तिथि तक पंजीकरण नहीं कराते हुए, उनकी मान्यता रद की जाएगी।
शिक्षा विभाग की ओर से आरटीई के लिए छह करोड़ का भुगतान उपशिक्षा अधिकारियों के खातों में जारी कर दिया हैं।
आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की फीस आदि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता हैं। यह भुगतान विभाग की ओर से उपशिक्षा अधिकारियों के माध्यम से स्कूलों के खातों में भेजा जाता है। पिछले दिनों उपशिक्षा अधिकारी कार्यालयों के माध्यम से विभाग को जिलेभर से छह करोड़ की डिमांड भेजी गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि डिमांड के अनुरूप छह करोड़ का भुगतान उपशिक्षा अधिकारियों के खातों में भेज दिया गया है। जिससे जल्द ही यह भुगतान स्कूलों के खातों में पहुुंच जाएगा।