विशाल चौधरी
रुड़की।
शुगर मिलों की ओर से विकास कमीशन नहीं देने से गन्ना समितियों का अस्तित्व ही खतरे में है, वहीं गन्ना विभाग की निर्माण शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को तो 18 माह से वेतन नहीं मिल पाया हैं। शुगर मिलों की ओर से कमीशन से होने वाला विकास कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
किसान अपना गन्ना समितियों के माध्यम से शुगर मिलों को बेचते हैं। जिस पर शुगर मिलों की ओर से समितियों को कमीशन दिया जाता है। इस विकास कमीशन में 75 प्रतिशत हिस्सा समिति और 25 फीसदी हिस्सा गन्ना विकास परिषद का होता है। गन्ना विकास परिषद अपने हिस्से से किसानों को अच्छी प्रजाति के बीज और समिति क्षेत्र में विकास कार्य कराता है। गन्ना विकास परिषद की ओर से इन विकास कार्य में पच्चीस प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है, बाकी 75 प्रतिशत हिस्सा जिला योजना से आता है। गन्ना विकास परिषद के पास 25 प्रतिशत पैसा नहीं होने से जिला योजना से 75 प्रतिशत भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। ऐसे में निर्माण शाखा के जेई और एई सहित अन्य कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें 18 माह से वेतन नहीं मिल पाया है। ऐसे में घर का गुजारा चलना भारी पड़ रहा हैं। वहीं दूसरी ओर सीडीओ आशीष नेगी भी मानते हैं कि करीब छह-सात माह से इन अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है।