रुड़की। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स आईआईटी रुड़की के तत्वावधान में वैज्ञानिकों ने रुड़की की ऐतिहासिक विरासत ‘सोलानी एक्वाडक्ट ब्रिज’ संजोने और गंगनहर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की है। यूपी सिंचाई विभाग से हरी झंडी मिलने पर आईआईटी में वैज्ञानिकों एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बैठक कर इसकी रूपरेखा तैयार की। इस दौरान छह सदस्यीय कमेटी गठित की। यह कमेटी आठ माह में सर्वे रिपोर्ट तैयार कर यूपी सिंचाई विभाग को सौंपेगी।
शनिवार को आईआईटी स्थित द इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के अध्यक्ष मलविंदर सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की। इसमें रुड़की की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने संबंधी प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर एवं सीबीआरआई वैज्ञानिक डा. अचल मित्तल ने बताया कि उन्होंने देश में कई धरोहर को संरक्षित करने के लिए शोध कार्य किया है। रुड़की भी ऐतिहासिक शहर है। इसे ध्यान में रखते हुए एक पहल की गई। इसके तहत यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ‘सोलानी एक्वाडक्ट ब्रिज’ को संरक्षित करने और गंगनहर को पर्यटक स्थल एवं स्पोर्ट्स एक्टिविटी विकसित करने के लिए पत्र भेजा। यूपी सिंचाई विभाग ने इसे मंजूरी देते हुए अपनी ओर से अधिशासी अभियंता सीबी यादव को नामित किया है। बैठक में मौजूद वैज्ञानिकों और अधिकारियों से विचार विमर्श के बाद रूपरेखा तैयार की। इस दौरान डा. अचल मित्तल की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई। कमेटी आठ माह में अध्ययन एवं सर्वे रिपोर्ट तैयार कर यूपी सिंचाई विभाग को सौंपेगी। मौके पर डा. अतुल अग्रवाल, प्रो. पीपी अग्रवाल, डा. आरडी गर्ग, अखिलेश वर्मा, इतरतअमीन सिद्दीकी, डा. एमके खरे आदि मौजूद रहे।
कमेटी में शामिल विशेषज्ञ
-डा. अचल मित्तल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में सीबीआरआई वैज्ञानिक डा. एलपी सिंह, डा. देवदत्त घोष, हिना गुप्ता, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता संदीप अग्रवाल, आर्केलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के कंजरवेशन डायरेक्टर आरएस जगवाल शामिल हैं।
उपयोग भले न हो, पर खड़ी रहे इमारत
पुराने लोगों ने गंगनहर किनारे बिताया काफी समय
रुड़की।
ब्रिटिश एंपायर के नायाब नमूने के रूप में वर्ष 1846 में रुड़की में सोलानी एक्वाडक्ट ब्रिज बनाया गया था। इंजीनियरिंग की मिसाल के रूप में स्थापित इस ऐतिहासिक पुल के ऊपर से गंगनहर का पानी गुजारा गया। खास बात यह है कि करीब 170 साल बाद भी यह पुल ज्यों का त्यों खड़ा है। यह बात अलग है कि अब सिंचाई विभाग ने इस पुल को भारी वाहनों के लिए जोखिम भरा घोषित कर दिया है। बैठक में मौजूद वैज्ञानिक डा. एचसी हांडा ने कहा कि यह देश की ऐतिहासिक धरोहर है। ऐसे में भले ही इसका आवाजाही के उपयोग न हो फिर भी यादगार के रूप में इसे संरक्षित करना जरूरी है।
आईआईटी में आयोजित कार्यक्रम में सीबीआरआई वैज्ञानिक ने इस बात पर जोर दिया कि सोलानी पुल और गंगनहर देश के प्रतिष्ठित पदों पर काम कर रहे सैकड़ों लोगों के लिए आज भी यादों में जुड़ा है। क्योंकि उन्होंने आईआईटी में पढ़ते हुए यहां काफी समय बिताया है। ऐसे में इस स्थल को खूबसूरती प्रदान करने की जरूरत है। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी सोलानी एक्वाडक्ट ब्रिज से जुड़ी रोचक जानकारियां दी। इस दौरान वैज्ञानिकों ने इस पर भी जोर दिया कि फिलहाल इस पुल से भारी वाहनों को प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है। वैज्ञानिकों ने इस पुल से सीख लेने की बात कहते हुए कहा कि जिस समय यह पुल बनाया था उस समय कल्पना भी नहीं की गई होगी कि यहां से कई टन लदे वाहन गुजरेंगे। इसलिए उस समय कम भार को ध्यान में रखते हुए इसे डिजाइन किया लेकिन, भारी वाहनों के गुजरने के बावजूद 170 साल बाद भी पुल ज्यों का त्यों खड़ा है। ऐसे में यह इंजीनियरिंग की नायाब मिसाल प्रस्तुत करता है। बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने माना कि गंगनहर और पुल को लेकर कई सर्वे हुए हैं लेकिन, धरातल पर काम नहीं हुआ। अधिकारियों का मानना था कि वैज्ञानिकों की ओर से जो डीपीआर यूपी सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। उसकी ज्यादा अहमियत होगी और धरातल पर काम के लिए योजना स्वीकृत कराने में आसानी होगी।
वाटर स्पोर्ट्स और वाटर टूरिज्म के लिए मुफीद
रुड़की की गंगनहर वाटर स्पोर्ट्स और वाटर टूरिज्म के लिए मुफीद है। यहां राष्ट्रीय स्तर की कैनोइंग-क्यांकिंग प्रतियोगिता भी हो चुकी है। इसके अलाव रुड़की में विभिन्न प्रदेशों से नौकायन प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ी ट्रेनिंग भी लेते रहे हैं। ऐसे में यहां पर स्पोर्ट्स और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
आईआईटी लाइब्रेरी में मौजूद हैं नक्शे
-ब्रिटिश अधिकारी कर्नल पीटी कॉटले ने रुड़की में गंगनहर निर्माण का बीड़ा उठाया था। इसके लिए खुदाई का काम वर्ष 1842 में शुरू कराया गया। इस पुल से जुड़े नक्शे आज भी आईआईटी के सेंट्रल लाइब्रेरी में मौजूद हैं। बैठक में पुल से जुड़े नक्शों का आईआईटी की लाइब्रेरी में मौजूद दस्तावेजों से अध्ययन कराने की बात कही गई।
उत्तराखंड-यूपी में चल रहा टूरिज्म प्रोसेस
-रुड़की से गुजरती गंगनहर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यहां कोई भी निर्माण के लिए यूपी से अनुमति की जरूरत होती है लेकिन, इस प्रोजेक्ट को यूपी सिंचाई विभाग की ओर से अनुमति प्रदान की गई है तो उम्मीद की जा रही है कि योजनाओं को क्रियान्वित करने में कोई परेशानी नहीं होगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कई सालों से उत्तराखंड और यूपी सरकार के बीच गंगनहर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चलती रही है लेकिन, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।